पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में छात्राओं ने एक से बढ़कर एक दी कजरी की प्रस्तुति
चुनार। रामबाग स्थित सुरभि शोध संस्थान में संस्कार भारती काशी प्रांत और श्रीराधाकृष्ण वनवासी छात्रावास के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को कजरी महोत्सव में छात्राओं ने एक बढ़कर एक प्रस्तुति दी। शुभारंभ कजरी गायिका पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
छात्रावास में अध्ययनरत मिजोरम, त्रिपुरा, असम, मेघालय, सिक्किम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की छात्राओं के साथ ही सोनभद्र की छात्राओं ने कजरी का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद आयोजित महोत्सव में कजरी गीतों की मनोहारी प्रस्तुति देकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्राओं ने कजरी गीतों पर नृत्य भी किया। संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने महोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव ने ‘कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया’, ‘बदरिया घिर आई ननदी’, ‘मिर्जापुर कइल गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कइला बलमू’ आदि कजरी की प्रस्तुति कर छात्राओं व महिलाओं को झूमने और नृत्य करने पर विवश कर दिया।
वनवासी छात्राओं ने ‘सावन झर लागेला धीरे-धीरे’, ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया’, ‘हरे रामा कृष्ण बने मनिहारी पहिन लिए साड़ी हो रामा’, ‘रिमझिम बरसे ला सवनवा कहिया अइहे सजनवा ना’ आदि कजरी गीतों की प्रस्तुति की। मुख्य अतिथि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहनलाल श्रीमाली ने कहा कि मिर्जापुर की कजरी सिर्फ गीत नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक धरोहर है। लोक कलाओं को जीवंत रखने और उन्हें संरक्षित रखने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। संस्थान की निदेशक प्रशिक्षक ममता शर्मा, महोत्सव प्रभारी सविता सिंह, व्यवस्थापक अमित चतुर्वेदी, दीपक कुमार, आकाश, आनंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।