सीखड़। क्षेत्र के मझरा कला गांव में खतौनी में किसानों के नामों में हुई गड़बड़ी की 62 साल पुरानी समस्या के समाधान के लिए मंगलवार को चौपाल लगाई गई। इसमें अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और दो महीने में उनके निस्तारण का आश्वासन दिया।
एसडीएम न्यायिक संजीव कुमार यादव, तहसीलदार योगेंद्र शरण शाह, नायब तहसीलदार कल्पना, सहायक अभिलेख अधिकारी और सर्वे टीम ने किसानों के खसरा, खतौनी इत्यादि अभिलेखों का अवलोकन करते हुए किसानों के आधार कार्ड के आधार पर नाम का मिलान किया। चुनार के भाजपा विधायक अनुराग सिंह काश्तकारों की समस्या को लेकर शासन को पत्र लिखकर सर्वे के दौरान खतौनी में किसानों के नाम में हुई गड़बड़ी के मुद्दे को उठाया था।
शासन ने डीएम को प्रकरण में 23 मई तक गड़बड़ी दूर करने का निर्देश दिया था। डीएम के निर्देश पर मंगलवार को टीम गांव पहुंचकर न सिर्फ किसानों की समस्याएं सुनीं बल्कि निस्तारण के लिए दो माह का समय मांगा। बताया जाता है कि 1967 में किसानों के खेतों का सर्वे कराया गया था। 28 वर्ष बाद 1995 रिपोर्ट आई लेकिन उसमें सुधार नहीं हो पाया। इसके बाद किसानों ने पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह से सर्वे के विरुद्ध आपत्ति कर जांच कर सर्वे को रद्द कर फिर से सर्वे की गुहार लगाई। इसे 2020 में ऑनलाइन कर दिया गया। लेकिन रिपोर्ट में 95 फीसदी से ज्यादा किसानों का रकबा, एरिया में हुई गड़बड़ी से किसान परेशान रहे। 300 किसानों ने तहसील दिवस और डीएम को भी प्रार्थना देकर मामला उठाया था लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी।
इससे आए खतौनी में नाम को लेकर किसानों में विवाद की स्थिति बनी रहती थी। फिर से शुरू हुए सर्वे कार्य से रविंद्र कुमार सिंह, सुशील कुमार सिंह, संदीप कुमार सिंह, रामलाल, माता चरण सिंह, नंदलाल साहनी, रामसमुझ सिंह आदि किसानों में हर्ष है। किसानों ने इसके लिए चुनार विधायक के प्रति आभार व्यक्त किया।