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सात वर्ष से नहीं मिला मानदेय, कैसे आएंगे कुपोषित बच्चे

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कुपोषित बच्चों के भरण पोषण और बेहतर उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल परिसर में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया है। इस केंद्र में कुपोषित बच्चों को लाने पर आंगनबाड़ी, आशा आदि कार्यकर्ताओं को 100 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से मानदेय देने का प्रावधान है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर 11 सौ से अधिक कुपोषित बच्चे अब तक आ चुके है। इस बीच सात वर्ष बीतने के बाद भी किसी को मानदेय नहीं मिला है। इस कारण से आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र पर लाने से कतराती हैं।
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मंडलीय अस्पताल परिसर में वर्ष 2015 में 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना हुई। यहां पर आरबीएसके टीम, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को ग्रामीण क्षेत्र से कुपोषित बच्चों को लाकर भर्ती कराना रहता है। यहां पर डॉक्टर और न्यूटिशियन बच्चों को दवा और बेहतर डाइट देकर उनको कुपोषण से मुक्त करने में सहयोग करते हैं। कुपोषित बच्चे का 15 प्रतिशत वजन बढ़ने पर उनको घर भेज दिया जाता है। माता-पिता को बच्चे को दी जाने वाली डाइट के बारे में बताया जाता है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उसका फॉलोअप किया जाता है। कुपोषित बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र पर लाने पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लोन और फॉलोअप करने पर प्रति बच्चे 150 रुपये मानदेय देने का प्रावधान है। वर्ष 2015 से अब तक पोषण पुनर्वास केंद्र में 1125 बच्चे भर्ती हो चुके हैं। इस समय छह बच्चे भर्ती हैं। उधर, कुपोषित बच्चे को लाने वाली आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को 2015 से अब तक एक रुपये मानदेय भी नहीं मिल सका है। जब मानदेय ही नहीं मिलेग तो फिर आंगनबाड़ी या आशा कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक कैसे ले आएंगी। इस मामले में लापरवाही बरतने पर डीएम डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर (डीपीएम) का वेतन रोकने का आदेश दे चुके हैं। इसके बावजूद आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बकाया मानदेय अब तक नहीं मिल सका है। पोषण पुनर्वास केंद्र के डॉ. पंकज रणधीर का कहना है कि 2018 में नियुक्ति होने पर पता चला कि आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को मानदेय 2015 से अब तक नहीं मिला है। बच्चे को लाने पर 50 रुपये और चार बार फॉलोअप करने पर 25-25 रुपये मिलते हैं। पैसा न मिलने पर सीएमओ कार्यालय को अवगत कराया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा का कहना है कि बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र पर लाने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मानदेय देने का प्रावधान है। इसकी निगरानी सीएमओ कार्यालय करता है। आंगनबाड़ी को पैसा न मिलने के मामले में डीएम ने डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर (डीपीएम) के वेतन रोकने का निर्देश दिया था। सीएमओ डॉ.राजीव सिंघल का कहना है कि कुपोषित बच्चों को लाने पर मानदेय मिलने का प्रावधान है। 2015 से अब तक मानदेय नहीं मिला है। इसकी जांच कराई जाएगी।
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