मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में इस समय किसी वार्ड में जगह नहीं है। पूरा वार्ड मरीजों से पट गया है। हालत ये है कि रात के समय इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को उपचार टेबल या स्ट्रेचर पर किया जा रहा है। प्रतिवर्ष मरीजों की संख्या बढ़ने पर यही हालत होता है। इसके बाद भी 12 वर्ष से बन रहा 150 बेड की नई बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हो सकी है। पूरा बजट मिलने के बाद भी कार्यदायी संस्था कार्य अधूरा छोड़कर फरार हो गई है। मामला शासन तक पहुंच गया है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
मंडलीय अस्पताल में इस समय मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पिछले एक सप्ताह से मंडलीय अस्पताल सर्जिकल, मेडिकल, बच्चा, महिला, प्राइवेट व अन्य वार्ड में सभी बेड फूल है। मरीजों के आने पर इमरेंजी में ही उपचार किया जा रहा है। रात के समय सबसे अधिक समस्या होती है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को टेबल, आदि पर पानी का बोतल लगाकर उपचार किया जाता है। यह समस्या प्रति वर्ष होती है। इसके बाद भी इसका हल नहीं निकाला जा सका है। मंडलीय अस्पताल के बगल में कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम 2007 से 150 बेड का अस्पताल बना रही है। कार्यदायी संस्था को 17 करोड़ दिया गया है। अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। कुछ कार्य बाकी है। इसके बाद भी पिछले तीन वर्षो से कार्य रुका हुआ है। 150 बेड का अस्पताल बन जाए। तो मरीजों के लिए बेड की समस्या का निराकरण हो जाए। अस्पताल भवन हैंडओवर का मामला शासन तक पहुंच गया है। इसके बाद भी निराकरण नहीं हो रहा है।
कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने 2007 में अस्पताल निर्माण का कार्य सौंपा गया था। संस्था को 17 करोड़ दिया गया था। संस्था को पैसा पूरा मिल गया है। कार्य अधूरा छोड़कर संस्था फरार हो गई है। आयुक्त ने संस्था के जीएम को बुलाया जो उसने जेई को भेजा था। मामला शासन के पास पहुंच गया है।
डा. आलोक कुमार, एसआईसी मंडलीय अस्पताल