चुनाव में नेता आधी आबादी को रिझाने में लगे हैं। महिलाओं का वोट हासिल करने की हर किसी में होड़ लगी है लेकिन टिकट देने में राजनीतिक दल ज्यादा उत्साही नहीं हैं। राजनीतिक दलों ने जिले की पांच सीटों पर 21 उम्मीदवार उतारे हैं लेकिन उनमें महिला प्रत्याशी एक ही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मझवां से सुचिस्मिता मौर्य को मैदान में उतारा है। वर्ष 2012 में भी मिर्जापुर सदर सीट से गरीब सामना पार्टी ने ब्रह्मा देवी को टिकट दिया था। यह सि्थति तब है जबकि यहां से सांसद अनुप्रिया पटेल हैं।
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राजनीति में भी उनकी सकि्रय भागीदारी जरूरी है। यह बात पंचायत चुनावों से जाहिर हो चुकी है। मगर कोठई राजनीतिक दल उनको उनकी जगह नहीं देना चाहता। महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं हुई और राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट नहीं देना चाहते।
यह दीगर बात है कि सभी राजनीतिक दल भी महिलाओं के उत्थान के लिए बढ़ चढ़ कर बाते करते हैं। विधानसभा चुनाव में आंकड़ों पर गौर करें तो विधानसभा 2007 के चुनाव में राजगढ़ विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी रेनू कुशवाहा, चुनार विधानसभा से निर्दल राजकुमारी ने चुनाव लड़ा जबकि किसी भी दल ने महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में नही उतारा था। यह स्थिति तब है जबकि सांसद अनुप्रिया पटेल हैं। पर न तो उनकी पार्टी अद सोनेलाल ने किसी महिला को टिकट दिया और न ही उनकी मां कृष्णा पटेल की पार्टी ने।