बाढ़ की तबाही झेल चुके जिले के लोग अब बीमारियों से परेशान हैं। पानी उतरने के बाद रोगों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। जिला चिकित्सालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों लंबी कतार लग रही है। अस्पतालों बेड खाली नहीं है।
छानबे, कोन, सिटी, पहाड़ी, मझवां, सीखड़, नरायनपुर, जमालपुर ब्लॉक में गंगा और अन्य नदियों, बंाधों में भी पानी भरने से लालगंज हलिया, मड़िहान, राजगढ़ समेत अन्य इलाको में अभी बाढ़ के प्रभाव से उबर भी नहीं पाए हैं कि बीमारियों ने सताना शुरू कर दिया है। लोग बुखार, उल्टी, दस्त, मलेरिया, टायफाइड, डेंगू से परेशान हैं। हालत यह है कि रोजाना 15 सौ से रोकी जिला चिकित्सालय पहुंच रहे हैं। सीएचसी व पीएचसी में बेड फुल हैं।155 बेडों वाले जिला चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड में तो एक बेड पर दो दो बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं।
यही स्थिति रही तो आने वाले समय में लोगों का इलाज करना मुश्किल हो जाएगा। विंध्याचल के कंतित निवासी सुनीता देवी विंध्याचल में डिलेवरी के लिए आईं थीं। जहां भारी गंदगी में उसे लिटा दिया गया। इससे तंग आकर वह वापस चली गई।
क्लोरीन व ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव कराया जा रहा है लेकिन दूषित पेयजल की समस्या से निजात नहीं मिली है। विंध्याचल के शिवपुर निवासी राकेश यादव ने बताया कि चिकित्सालय में दवा नहीं मिली। बताया गया कि दवाएं खत्म हो गई हैं। कलवारीपुर के अवधेश कुमार बिंद टायफाएड से पीड़ित हैं। उनको जांच में दिक्कत पेश आई।
विंध्याचल सीएचसी पर रोजाना 700 मरीज सीएचसी पर आ रहे हैं। चिकित्सालय में दवाओं की भारी कमी है। सफाई भी ठीक से नहीं हुई है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी संतोष कुमार सिंह का कहना है कि मरीजों की संख्या के हिसाब से संसाधन नहीं है।
राजगढ़ की ददरा ग्राम पंचायत की यादव व दलित बस्ती में दूषित पानी पीने से मंगलवार की रात 20 से अधिक लोग डायरिया के शिकार हो गए। दो लोगों को सीएचसी राजगढ़ में भर्ती कराया गया है जबकि अन्य का गांव में ही इलाज चल रहा है। सीएमओ डा. एके चौरसिया ने सीएचसी राजगढ़ के चिकित्सक डा. प्रदीप यादव के नेतृत्व में टीम गांव में भेजी,जिसने क्लोरीन की गोलियां दीं और ब्लीचिंग पावडर का छिड़कवाया।