गांवों में ग्राम प्रधान खुद ही ठेकेदार बन बैठे हैं। लाभार्थियों के खाते से धनराशि निकलवा कर स्वयं आवास को बनवा रहे हैं। प्रधानों द्वारा आवास बनवाने में मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। लाभार्थियों द्वारा प्रशासन से कई बार मांग के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रधानों द्वारा लाभार्थियों का पासबुक भी अपने पास रख लिया गया है।
जिले में लोहिया आवास बनवाने में मानकों की अनदेखी की जा रही है। क्षेत्र के लोहिया गांव रेरूपुर, कैमा रसूलपुर, जोगवा, छोटा मिर्जापुर, सिकरौडी, गोगहरा आदि में लाभार्थियों का चयन किया गया है। इन गांवों के प्रधानों ने लाभार्थियों का पासबुक भी अपने पास रखा है। लोहिया आवास के निर्माण के नाम पर प्रधान लाभार्थियों से अपने नाम चेक लेकर भुगतान करा ले रहें जबकि कुछ प्रधान तो सादे विदड्राल फार्म पर हस्ताक्षर करा कर और बैंक कर्मी से मिल कर धन निकाल रहे हैं इसके बाद आवास का निर्माण करा रहे हैं।
इससे लाभार्थी को पता ही नही चल पा रहा है कि खाते से कितना पैसा निकला है। लोहिया आवास के लाभार्थी रेरुपुर की सुदर्शन, उषा देवी, गोगहरा में राज कुमार, लक्ष्मण, मालती देवी के लोहिया आवासों को प्रधान द्वारा बनवाया जा रहा है। प्रधानों द्वारा लोहिया आवास में घटिया भवन सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। लाभार्थियों की मानें तो प्रधानों द्वारा पासबुक लेकर विदड्राल भरवा कर पैसा ले लिया जा रहा है। लाभार्थियों ने मामले की शिकायत बीडीओ घनश्याम गुप्ता से कई बार किया है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नही हुई है जिससे लाभार्थियों में गुस्सा है।