मिर्जापुर। प्रदेश सरकार युवाओं को स्वरोजगार अपनाने और उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन बैंकों की मनमानी के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है। आवेदन करने वाले युवाओं को बैंकों से ऋण नहीं मिल रहा। चालू वित्तीय वर्ष में बैंकों को 5437 आवेदन भेजे गए थे, जिनमें 3022 को स्वीकृति मिली है। जबकि 1570 आवेदन अभी तक लंबित हैं।
युवाओं को रोजगार से जोड़ने व उनको रोजगार देने वाला बनाने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना चलाई जा रही है। इसके तहत उद्योग विभाग के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में 1009 आवेदन बैंकों को भेजे जा चुके हैं लेकिन सिर्फ 130 को स्वीकृति मिली है। 158 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं जबकि 721 अभी लंबित हैं। संयुक्त निदेशक उद्योग वीरेंद्र कुमार ने बताया कि 721 आवेदन तक बैंकों मेंं लंबित हैं, जिन पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया।
इसी प्रकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग की ओर से 4398 आवेदन भेजे गए थे। इनमें से 2876 आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है जबकि 735 लंबित हैं। डीसी एनआरएलएम बब्बन राय ने बताया कि बैंकों से ऋण की स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसी तरह जिला खादी व ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से 30 आवेदन भेजे गए थे। इनमें से 16 को स्वीकृति मिली है जबकि 14 लंबित हैं। जिला खादी व ग्रामोद्योग अधिकारी अमितेश कुमार ने बताया कि बैंकों से ऋण के लिए मंजूरी मिलने के बाद बाकी प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
वर्जन
ऋण की मंजूरी के लिए निर्धारित प्रक्रिया होती है। उसी के अनुसार तय समय में कार्रवाई की जाती है। बैंकों का प्रयास होता है कि पूरी प्रक्रिया का पालन कर आवेदनों को स्वीकृति दी जाए। - अभिषेक कुमार, लीड बैंक प्रबंधक