हलिया। औरा स्थित परमहंस आश्रम में रविवार को संगीतमय भजन के बाद स्वामी अड़गड़ानंद के शिष्य तुलसी दास महाराज ने कहा कि तीरथ करने से एक फल की प्राप्ति होती है, संत पुरुष के मिलने पर चार यदि सदगुरु मिले तो व्यक्ति को अनंत फल का लाभ प्राप्त होता है।
उन्होंने भक्तों को यथार्थ गीता का पाठ तथा गुरू के स्वरूप का ध्यान और ढाई अक्षर नाम के जाप करने को कहा। तुलसी दास महराज ने कहा कि साधना के लिए ध्याता, ध्यान, ध्येय की तीन विधि होती है। इससे भगवान की प्राप्ति भक्तों को होती है। विश्वामित्र, राम, लक्ष्मण को लेकर मिथिला पहुंच गए। धनुष यज्ञ में जिस फूल बगिया में गए वहां प्राणों से ज्यादा प्रेम करने वाली भक्त सीता को दर्शन देना था। कहा सच्चे मन से भगवान को स्मरण करने वाले को स्वयं भगवान चल कर दर्शन देते हैं। इस अवसर पर शिव बाबू सेठ, रमाकांत पांडेय, प्रमोद अग्रहरी सहित सैकड़ो श्रोता मौजूद रहे।