हलिया। प्रसिद्ध गड़बड़ा धाम में शहरहवा मेला सोमवार को मां शीतला के मंगल आरती के बाद शुरू हुआ। भोर से ही श्रद्धालुओं का जत्था माता धाम स्थित सेवटी नदी की ओर पहुंचने लगा था। स्नान ध्यान के पश्चात गर्भगृह में पहुंच रहे थे। मां के दर्शन पूजन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगी थी।
गड़बड़ाधाम में मेला के पूर्व संध्या पर ही दूर-दराज से आए भक्तों ने रात्रि में डेरा डाल दिया था। सेवटी नदी में स्नान के पश्चात मां की आरती में सम्मिलित हुए। अव्यवस्थाओं के बीच करीब चार लाख भक्तों ने माता शीतला का दर्शन पूजन किया। आस्था इस कदर की कड़ाके की ठंड में पेड़ों की छांव अथवा प्लास्टिक की पन्नी डालकर जिसे जहां भी जगह मिला वहीं पर परिवार सहित ठिकाना बनाए रहा। चार किलोमीटर परिधि में मेला लगा रहा। भीड़ भाड़ वाले स्थान पर वैरिकेडिंग की व्यवस्था न होने से दर्शन पूजन के साथ ही अन्य स्थानों पर श्रद्धालुओं को परेशान होना पड़ा।
एसडीएम लालगंज भरत लाल सरोज, तहसीलदार आशीष पांडेय, सीओ मंजरी राव सहित पुलिस फोर्स मेला क्षेत्र में चक्रमण करते रहे। मेला क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए सेमरा व गलरा मार्ग पर बैरियर लगाया गया था। मेला क्षेत्र में अस्थाई रैन बसेरा, शौचालय तथा पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घाटों पर महिलाओं को पर्याप्त वस्त्र बदलने की व्यवस्था न होने से उन्हें खुले में ही वस्त्र बदलने के लिए विवश होना पड़ा।
मेले में मध्य प्रदेश के रीवा, सीधी, सिंगरौली तथा पड़ोसी जिले प्रयागराज, सोनभद्र भदोही, वाराणसी, चंदौली आदि जनपदों से काफी संख्या में श्रद्धाुओं ने मां शीतला का दर्शन पूजन किया। मेले में बच्चों के लिए झूले के साथ ही मिठाई, चाट, फुल्की, गुड़हिया जलेबी के साथ ही लाई, चिउड़ा, गट्टा के अलावा बांस से बने घर व गृहस्थी के सामानों से मेला क्षेत्र पटा रहा। माता के दर्शन के पश्चात बच्चों और महिलाओं ने चाट, फुल्की का आनंद उठाया।
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आमघाट मेले में उमड़े रहे श्रद्धालु, उठाया मेले का आनंद
मिर्जापुर। सिटी विकास खंड के राजपुर में खजुरी नदी के किनारे सोमवार को आमघाट मेले में श्रद्धालु उमड़े रहे। नदी के किनारे गड़बड़ा महरानी के प्रतीक मंदिर में लोगों ने दर्शन-पूजन कर मेले का आनंद उठाया। मेले में चाट, फुल्की, जलेबी सहित प्रयागराज, कौशांबी व प्रतापगढ़ से आए गन्ने और जौनपुर के मूली की खूब बिक्री हुई।