मिर्जापुर। जिले में गंगा का पानी नहाने तो दूर आचमन के लायक भी नहीं है। 2018 से 2020 के बीच गंगा में तेजी से प्रदूषित बढ़ा है। शासन की रिपोर्ट में मिर्जापुर और काशी के गंगाजल को सर्वाधिक प्रदूषित बताया गया है और इसे डी श्रेणी में रखा गया है। इसको लेकर बृहस्पतिवार को लखनऊ में बैठक हुई और चिंता व्यक्त की गई। गंगा में प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने जिले में नमामि गंगे के तहत चल रहे कार्यक्रमों व प्रयासों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जिले में गंगा की 120 किमी लंबाई है। इसके तट पर नगर के अलावा कछवां, चुनार व नारायणपुर बाजार तथा सैकड़ों गांव बसे हुए हैं। नगर में सात बड़े बड़े नाले सीधे गंगा में गिराए जा रहे हैं। इनको लेकर कुल 27 नाले हैं। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधन किए बिना पानी गंगा में गिराया जा रहा है। गंगा में नाला गिराने पर एनजीटी नगर पालिका प्रशासन पर बजट में कटौती व जुर्माना लगा चुका है इसके बाद भी नालों को बंद नहीं किया गया। अब प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने भी जिले में गंगा में प्रदूषण की स्थिति पर चिंता जतायी है। साथ ही कार्रवाई के प्रति सचेत किया है। नगर पालिका क्षेत्र में छोटे- बड़े मिलाकर 27 नाले हैं। इनमें से 10 नालों की टेपिंग हो चुकी है। पांच की टेपिंग का काम चल रहा है जो 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद भी 12 नाले शेष रहते हैं जो बिना शोधित गंदा पानी नदी में बहा रहे हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। जिले में गंगा के पानी में घुलित आक्सीजन 8.30 मिग्रा/प्रतिलीटर है, जो संतोषजनक है। पानी में घुलित आक्सीजन की मात्रा सात या उससे अधिक होनी चाहिए लेकिन पानी में बीओडी यानि बायो केमिकल्स आक्सीजन डिमांड की बढ़ रही मात्रा चिंता की बात हो गई है। यह 3.40 मिलीग्राम/ प्रतिलीटर से अधिक हो गया है। जबकि बीओडी की मात्रा तीन मिग्रा /प्रतिलीटर से कम होना चाहिए। जिले में गंगा का पानी ही नहीं भू गर्भ जल स्तर भी प्रदूषित हो गया है। पानी में फ्लोराइड की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। मजबूरी में ग्रामीण प्रदूषित पानी पीने का बाध्य हो रहे हैं। इससे हड्डी जनित व पेट संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
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मल जनित गंदे पानी से बढ़ रही चिंता
मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में मल जनित व अन्य स्रोतों से गंदा पानी की मात्रा लगभग 32 एमएलडी आंकी गई है। इसमें मल जनित पानी के शोधन के लिए विंध्याचल में चार एमएलडी व नगर के पक्का पोखरा में 14 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया गया है। इसके साथ ही विंध्याचल में सात एमएलडी का एक एसटीपी और बन रहा है। इससे कुल शोधित पानी की क्षमता 25 एमएलडी हो जाएगी। इसके बाद यदि सभी नाले टेप कर लिए जाते हैं तो नगर का पूरा पानी शोधित होकर ही गंगा में जाएगा। नमामि गंगे की इन योजनाओं से गंगा जल के निर्मलीकरण का काम होगा। स्वच्छ भारत मिशन के जिला प्रबंधक संजय सिंह ने बताया कि सभी कार्य प्रगति पर है। चूंकि कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई है। जलनिगम भी शामिल है। इससे कुछ विलंब हो रहा है लेकिन अधिक नहीं। उससे कोई समस्या नहीं है। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि चूंकि मिर्जापुर में कल- कारखाने लगभग शून्य हैं। इसलिए केमिकल डिस्चार्ज की समस्या नहीं है।
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चुनार में नालों के पानी से बढ़ रहा प्रदूषण
चुनार। सरकार द्वारा गंगा स्वच्छता पर भारी रकम खर्च किया जा रहा है बावजूद इसके अभी भी गंगा प्रदूषण से मुक्त नहीं हो पा रही है। गंगाघाटों पर आज भी धोबियों द्वारा टेंट के पर्दे, मैंट एवं घरेलू कपड़ों की धुलाई गंगा के पानी से किया जा रहा है। स्नान के दौरान लोग साबुन, शैम्पू और गंदे कपड़े को धुलने का कार्य कर रहे हैं। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए पालिका प्रशासन द्वारा गंगाघाटों पर सूचना एवं चेतावनी बोर्ड इस बात का लगाया गया था कि गंगा किनारे शौच कर गंदगी न करे व गंगा में स्नान के दौरान कोई भी व्यक्ति साबुन का प्रयोग न करे बावजूद इसके लोग गंगा घाटों पर शौच व स्नान के दौरान साबुन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि पालिका प्रशासन गंगा स्वच्छता को लेकर गंगा में गिरने वाले 11 नालों के गंदगी को रोकने के लिए छह नाले की टेपिंग की गयी है। सफाई निरीक्षक मिथिलेश कुमार ने बताया कि पालिका क्षेत्र में स्थित सभी 11 नाले के ठोस अपशिष्ट की बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड की जांच करा ली गयी है जिसकी कार्य योजना गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बनवाये जाने हेतु पालिका की ओर जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। नगर पालिका क्षेत्र में कोई भी औद्योगिक फैक्ट्री नहीं है गंगा में नगर के नालों के ही पानी गिर रहे हैं।
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अनुमानित प्रदूषित जल: 32 एमएलडी
गंगा में प्रदूषण रोकने के उपाय
एसटीपी विंध्याचल में: चार एमएलडी
नगर के पक्का पोखरा में: 14 एमएलडी
प्रस्तावित: सात एमएलडी
टेप नाले: 10
कार्य गति पर: पांच नाले
प्रस्तावित: 12 नाला