पड़री। कोरोना काल में मजबूरी के चलते रोजगार छोड़ अपने घर लौट रहे प्रवासियों की भूख से खेल शुरू हो गया है। बाहर से आने वाले प्रवासियों को जो राशन किट दिया जा रहा है उसमें निर्धारित सामग्री से न केवल कम सामान दिया जा रहा है बल्कि कुछ सामग्रियों का नामोनिशान तक नहीं है। अमर उजाला की टीम ने क्षेत्र के कपसौर स्थित शिवलोक श्रीनेत महाविद्यालय में बनाये गए शेल्टर होम में जाकर पड़ताल की और वहां से किट लेकर जा चुके कुछ लोगों से बातचीत की तो पता चला कि उनको अरहर की दो किलो दाल की जगह केवल एक किलो दाल ही मिली। आलू भी नहीं दिया गया। कुछ लोगों ने भुना चना न मिलने की भी शिकायत की। यह स्वार्थपूर्ण खेल तब चल रहा है जब शासन प्रवासियों के स्वास्थ, सुरक्षा और खानपान को लेकर बेहद गंभीर है और इस संबंध में सख्त निर्देश दे रखे हैं।
प्रवासियों को दी जा रही राशन किट में मनमानी की शिकायत कई दिनों से की जा रही थी। अमर उजाला को जब इस बाबत जानकारी हुई तो एक टीम ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि लगातार तीन दिन शेल्टर होम में बांटी जा रही किट व्यवस्था की पड़ताल की और लाभार्थियों से पूछताछ की। वहां से सामान लेकर घर जा चुके लोगों से भी वार्ता हुई। इतना ही नहीं वहां के कर्मचारियों से भी इस बाबत जानकारी हासिल की गई। इसमें चौंकाने वाले तथ्य निकलकर सामने आए। पता चला कि जो राशन किट पड़री के शेल्टर होम में बांटी जा रही है उसमें दो किलो अरहर की दाल के बजाय एक किलो ही दिया जा रहा है। पांच किलो आलू तो दूर एक ढेला भी प्रवासियों को नहीं दिया जा रहा है। और तो और भुना चना न मिलने की बात भी निकलकर सामने आई।