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1600 किमी साइकिल चलाकर आए चार युवक

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1600 किमी साइकिल चलाकर आए चार युवक
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चेतगंज। 1600 किमी की यात्रा साइकिल से करके 12 युवक शनिवार को चील्ह थाना क्षेत्र के धौरुपुर पहुंचे। क्षेत्र के चार युवक विजय चौहान, पुत्र शंकर, कृष्ण कुमार पुत्र मोहन, राजनाथ चौहान पुत्र दिनेश चौहान, शिवमंगल सूरत में नौकरी करते थे। वहां पर हीरा फैक्ट्री में काम करते थे। लाकडाउन होने के बाद परेशानी को देखते हुए चारो युवक साइकिल से 1600 किमी की यात्रा कर शनिवार को घर पहुंचे।
हैदराबाद से सोनभद्र पैदल गए सात मजदूर
पटेहरा। हैदराबाद से सोनभद्र के लिए पैदल जा रहे सात मजदूर हैदराबाद से पैदल 21 दिन का सफर तय करने के बाद पटेहरा के रास्ते शनिवार को सोनभद्र के लिए रवाना हुए। मजदूर 21 दिन से पैदल सफर तय कर रहे है। ऊप्र से सामान का बोझ लेकर चल रहे है। मजदूरों ने बताया कि पैदल 21 दिन के सफर में मात्र सात दिन भोजन मिला। बाकी किसी प्रकार घर भुखे ही फसर तय किया।
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बाहर से आए लोगों की हुई जांच
जमालपुर। क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शनिवार को बाहर से आए लोगों का थर्मल स्कैनिंग मशीन से जांच कराई गई। इसमें हैदराबाद से जमालपुर ग्राम पंचायत के सेमरा गांव निवासी महेश कुमार दिल्ली वापस लौटे। सूरज गुजरात, मदरा ग्राम पंचायत के शाहपुर माफी निवासी रामफरेश, सिकंदरपुर ग्राम पंचायत निवासी सविता, आशा, ओड़ी ग्राम पंचायत निवासी महेंद्र, रामकृत, फतेहबहादुर और रामललित ने स्वास्थ्य की जांच कराई। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. राजन सिंह ने बताया कि बाहर से आए सभी लोग स्वस्थ्य है। उनको 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन रहने को कहा गया है।
गोरखपुर से पैदल पहुंचे दो युवक
विंध्याचल। कोरोना वायरस गंभीर बीमारी चलते पूरे देश में लॉक डाउन होने से बहुत से लोग दूरदराज फंसे हुए है। निवार को विंध्याचल के महुआरी कला शिवाला घाट के निवासी दो युवक सलीम पुत्र हाशमी व मठल्लु पुत्र सफीतुल्ला गोरखपुर में रह कर हर्बल प्रोडक्शन कंपनी में काम कर रहे थे। लॉक डाउन के चलते कुछ दिनों तक वहीं रहकर जीवन यापन कर रहे थे लेकिन ज्यादा दिन लॉक डाउन होने, काम बंद होने के चलते परेशानी होने लगी। इसके बाद दोनों पैदल वापस घर के लिए चले। गोरखपुर में जांच कराकर निकले थे।
35 श्रमिकों की हुई जांच
ड्रमंडगंज । रीवा मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ड्रमंडगंज में शनिवार को दूसरे प्रदेशों से आने वाले 35 श्रमिकों का थर्मल स्क्रीनिंग टेस्ट करने बाद सभी को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन पर रहने के लिए घर भेज दिया गया । ड्रमंडगंज सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डा.रियाजुद्दीन के मुताबिक सूरत गुजरात से पैदल अपने घर पथरहा हलिया के लिए चले श्रमिक भागीरथी, कमलेश, ज्ञानशंकर, विजय, सूरज, संतलाल आदि ने बताया कि सूरत में रहकर कार्य करता था। लेकिन लाक डाउन होने से कार्य बंद हो गया । जिससे उनके पास खाने पीने की समस्या उत्पन्न हो गई ।कोई साधन नहीं मिलने पर हम लोग पैदल ही घर के लिए चल दिए । बीच में कई जगह कच्चे माल के वाहनों पर बैठकर कुछ दूर की यात्रा पूरी की । कई जगह पर उनका चेकअप भी हुआ है ।
फैक्ट्री बंद होने पर पैदल घर गए मजदूर
लालगंज। मध्य प्रदेश के मैहर सीमेंट फैक्ट्री में कार्यरत मजदूर शनिवार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज पैदल पहुंचे। मैहर स्थित सीमेंट फैक्ट्री लाकडाउन के कारण बंद हो गई थी। जिसके कारण उनको अपने गांव बिहार मुजफ्फरपुर के लिए निकलना पड़ा। बिहार मुजफ्फर निवासी अमरेश प्रजापति, प्रहलाद पंडित ,रोबिन कुमार, अशरफी साह, बिकाऊ पंडित, जाहिर पैदल ही लालगंज दुबार रोड से होते हुए जा रहे थे। कमाई दारों ने बताया कि सीमेंट फैक्ट्री के बंद होने पर रोजी रोजगार की समस्या और खर्च के लिए पैसे की कमी उन्हें घर जाने के लिए मजबूर कर दिया।
युवक को किया गया क्वारंटीन
कैलहट। प्राथमिक विद्यालय कैलहट बाजार में अन्य प्रदेश से आने वाले गांव के लोगों के लिये बनाए गए शेल्टर होम में पुणे से आये हुए अमन पुत्र बेचन को प्राथमिक विद्यालय कैलहट बाजार में क्वारंटीन कराया गया। स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर जांच कराई गई।
दवा व्यवसायी की हुई जांच
अदलहाट। वाराणसी दवा मंडी के कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले अदलहाट के मेडिकल स्टोर संचालक ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चुनार में पड़ताल कराया। बाजार स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक व उसका एक सहायक दस दिन पूर्व वाराणसी मंडी से दवा लिया था। उसको कोई भी परेशानी न होने के बाद भी चिकित्साधिकारी चुनार ने अपना जांच पड़ताल कराया।
लाकडाउन में झेलनी पड़ी परेशानी
चुनार। क्वारंटीन सेंटर में सूरत व झांसी से आये श्रमिकों ने बताया कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी है। सालौन सिल्क इंडस्ट्रीज सूरत के सुपरवाइजर देवदत्त शुक्ला, बृजेश कुमार, बनारसी व हासीम अंसारी सहित अन्य श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अप्रैल माह का मजदूरी नही दिया गया। कंपनी ने सूरत से पास बनवाकर एक प्राइवेट बस से 30 अप्रैल की शाम चार बजे सभी श्रमिकों को रवाना कर दिया। किराये के एवज में कंपनी ने प्रति श्रमिक एक हजार रुपये लिया है। वहीं परीक्षा पावंर प्लांट झांसी में काम करने वाले तोसवा भेलवों निवासी कृष्ण कुमार पांडेय ने बताया कि प्लांट में ठेकेदारी के तहत काम करता हूं। अप्रैल माह का मजदूरी भुगतान बैंक खाते में भेजने की बात कही गयी है। भुगतान न मिलने से जटिल आर्थिक समस्या बनी हुई है।
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क्वारंटीन में भी जारी रखी शिक्षा
चुनार। क्वारंटीन सेंटर में झांसी से आये चुनार तहसील क्षेत्र के फुलहां गांव निवासी मिथुन कुमार ने क्वारंटीन होने के बाद भी अपनी शिक्षा को जारी रखा हुआ है। मिथुन ने बताया कि वह राजकीय पालिटेक्निक झांसी से मैकैनिकल ट्रेड से पालीटेक्निक कर रहे हैं। कहा कि विषम परिस्थितियों में भी हौसले बुलंद रखनी चाहिए। वही भदोही निवासी कैलाशनाथ ने बताया कि हैदराबाद से झांसी तक साइकिल से पहुंचा हूं, उसके बाद झांसी से सरकारी बस से चुनार आया हूं। बताया कि हैदराबाद की कृपाल कंपनी जिसमें प्लास्टिक का दाना बनाने का काम होता है उसी में मजदूरी करता हूं।
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