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Mirzapur News: जरगो के चार गेट खुले, गड़ई नदी उफनाई

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जरगो जलाशय के दो फाटक से बहाया जा रहा पानी।- सोशल मीडिया।
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अहरौरा। क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते सिरसी के बाद अब जरगो जलाशय के चार गेट खोल दिए गए हैं। यहां से 2700 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, अहरौरा बांध से गड़ई नदी के रास्ते 450 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी की निकासी की जा रही है। इससे गड़ई नदी उफना गई है और अहरौरा-चकिया मार्ग पर मदारपुर गांव के पास पुल के ऊपर एक फीट से अधिक पानी बह रहा है। इससे आवागमन प्रभावित होने से राहगीरों को परेशानी हो रही है।
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जरगो जलाशय के जेई अजीत सिंह पटेल ने बताया कि सोमवार रात जलाशय क्षेत्र में अच्छी बारिश होने से पानी की आवक तेजी से बढ़ी। 31 अगस्त तक जलाशय में 318 फीट पानी रोकने का आदेश है। मंगलवार सुबह पांच बजे बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दो गेट एक-एक फीट खोलकर 1106 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की आवक और बढ़ने पर दोपहर में दो और गेट छह-छह इंच खोले गए। इसके बाद कुल 2700 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी की निकासी की जा रही है। शाम चार बजे जलाशय का जलस्तर 318.9 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 322 फीट है। बांध से पानी छोड़े जाने के कारण गड़ई नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। मदारपुर पुल पर पानी आने से मार्ग से गुजरने वाले लोगों को सतर्कता बरतनी पड़ रही है।



क्षमता से 11 फीट कम पानी, फिर भी बांध से 450 क्यूसेक निकासी
अहरौरा। अहरौरा बांध में क्षमता से 11 फीट कम पानी होने के बावजूद गड़ई नदी के माध्यम से 450 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी छोड़ा जा रहा है। आरोप है कि मेन कैनाल सुलिस का निर्माण समय से पूरा नहीं कराया गया और अब मध्य बरसात में सुलिस गेट का निर्माण कराया जा रहा है। इससे जमालपुर क्षेत्र के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है। बांध के जेई ओमप्रकाश राय ने बताया कि शाम चार बजे बांध का जलस्तर 349 फीट था, जबकि इसकी क्षमता 360 फीट है। भारतीय किसान जन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार चौबे उर्फ मुन्ना चौबे ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की कमी छिपाने के लिए पानी बहाया जा रहा है।
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पानी निकासी बाधित, पचासों बीघा धान की फसल जलमग्न

अदलहाट। क्षेत्र के बेलहर मौजा में बारिश का पानी निकासी बाधित होने से पचासों बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण किसानों को फसल सड़ने की चिंता सताने लगी है। किसानों का आरोप है कि पानी निकासी के रास्ते पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है, जिससे पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। सुनीता देवी, सुखना देवी, मुन्नी देवी, कौशिलया, कृष्णावती, रामा देवी, सीता, गुड़िया, नरेश, सुरेश, पकौड़ी, दिनेश, रजिंद्र और बेचई आदि किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी जलभराव से उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। राजस्व विभाग की ओर से पूर्व में सर्वेक्षण भी कराया गया, लेकिन प्रभावित किसानों को अब तक सहायता नहीं मिल सकी।
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