मड़िहान। तहसील परिसर में शुक्रवार को पौधरोपण कर वन महोत्सव का आयोजन किया गया। उपजिलाधिकारी शिवप्रसाद ने पाकड़ का पौधा लगाकर उसके महत्व के बारे में भी बताया। पीसीएस अधिकारी अमित शुक्ला ने बालमखीरा, तहसीलदार ओमप्रकाश पांडेय ने बरगद तथा वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप कुमार मिश्र नें महुआ के पौधे का रोपण किया।
वक्ताओं ने कहा कि पेड़ पौधों का हमारे जीवन में महत्व तो वैसे भी है लेकिन कुछ पौधों के हमारे जीवन में विशेष महत्व होते हैं। वातावरण से हानिकारक कार्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित करके वे हमको आक्सीजन प्रदान करते हैं। जो जीवनदायिनी साबित होती हैं। जानकारों की मानें तो बरगद का वृक्ष त्रिमूर्ति का प्रतीक है। इसकी छाल में विष्णु, जड़ में ब्रह्मा तथा शाखाओं में शिव का वास माना जाता है। जिस प्रकार पीपल को विष्णु का प्रतीक माना जाता है। उसी प्रकार बरगद को शिवजी प्रतिमा माना जाता है। यह प्रकृति के सृजन का प्रतीक है। इसलिए संतान के इच्छुक लोग इसकी विशेष पूजा भी करते हैं। बालमखीरा पूर्ण रूप से औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग मधुमेह, पेचिश, निमोनिया, गुर्दे की पथरी, त्वचा रोग, गठिया, दांत दर्द, सूखी खांसी तथा जोड़ों के दर्द के लिए बहुत ही लाभकारी है।