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कोहरा और बादलों से बढ़ी ठिठुरन

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कोहरा और बादलों के बीच बृहस्पतिवार को तापमान में आई गिरावट से ठिठुरन बढ़ गई। तेज हवाओं के बीच ठंड व गलन से आम जन बेहाल रहे। दिन चढ़ने पर धूप जरूर निकली, लेकिन दिन भर धुंध छाया रहा। सर्द हवाओं के चलते बढ़ी गलन से दिन भर लोग ठिठुरते रहे। घरों से बाहर निकलने की बजाय लोग घरों में ही रहे।
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डीएसटी महामना जलवायु परिवर्तन केंद्र के समन्वयक एवं ग्रामीण कृषि मौसम सेवा बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो.आरके मल्ल व तकनीकी अधिकारी (युवा मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की वजह से इधर कुछ दिन बादल छाए रहने व कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। कोहरे व शीतलहर के बीच सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। दिन में ही हेडलाइट व हार्न के सहारे सड़कों पर वाहन चलते रहे। कोहरे के चलते रेल यातायात भी प्रभावित रहा। कई सवारी गाड़ियां विलंबित रहीं। इसके चलते इस ठंड में यात्रियों को भी ट्रेनों का इंतजार करना पड़ा। रेलवे स्टेशन के अलावा बस स्टैंडों पर यात्री ठंड से ठिठुरते दिखे। जहां भी अलाव दिखा, लोग उसके पास खड़े होकर ठंड से निजात पाने में जुटे रहे। कहीं लकड़ियां तो कहीं पर रद्दी कागज ही जलाकर लोग राहत पाने में जुटे रहे। सदर, लालगंज, चुनार व मड़िहान तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर समुचित अलाव की व्यवस्था नहीं होने से चट्टी और चौराहों पर राहगीर सहित यात्री ठंड में ठिठुरते दिखे। सक्तेशगढ़ क्षेत्र में घना कोहरा होने के चलते वाहनों की रफ्तार धीमी रही। आसमान में बादलों की आवाजाही से खिल कर धूप नहीं निकलने व घना कोहरा होने से दलहन व तिलहन की फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिगना क्षेत्र में घने कोहरे व गलन के चलते आम जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। आम दिनों की अपेक्षा बृहस्पतिवार को चट्टी और चौराहों पर सन्नाटा सा पसरा रहा। शेरवां क्षेत्र में भी आम जन ठंड से बेहाल रहे। शासन-प्रशासन की ओर से क्षेत्र में कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। गलन बढ़ने से लोग घरों में ही दुबके रहे। उधर, दिनभर छाए धुंध के बीच बृहस्पतिवार की शाम अचानक मौसम ने करवट ली। गरज-चमक के साथ कहीं-कहीं हुई बारिश से आम जन बेहाल हो उठा। बारिश के चलते सड़कों पर फिसलन बढ़ गयी।
पानी थमते ही ठंड के बीच लोग ठिठुरते अपने-अपने घरों की ओर भागते दिखे। जगह-जगह समय से पहले ही दुकानों के शटर गिर जाने से सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। बेमौसम बारिश होने से किसान भी चिंतित हो उठे। वैसे ही शीतलहर व पाला के चलते आलू की फसल बर्बाद हो चुकी है। दलहन व तिलहन फसलों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों का मानना है कि यदि खेतों में पानी लग गया तो बचे खुचे आलू भी सड़ जाएंगे।
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