मिर्जापुर। जिले में बाढ़ का पानी एक बार फिर से बढ़ाव पर है। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक शनिवार की शाम को गंगा का जलस्तर 75.347 मीटर रिकार्ड किया गया। जिले में गंगा का खतरे का निशान 77. 540 मीटर है।
नियंत्रण कक्ष के मुताबिक गंगा का जलस्तर तीन सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में पहाड़ी व सीखड़ विकास खंड में भी गंगा का पानी चढ़ाव पर है। नगर के घाटों की अधिकांश सीढ़ियां डूब चुकी हैं।
चील्ह-विकास खंड कोन के गंगा के तटवर्ती इलाकों में गंगा के बाढ़ को देखते हुए ग्रामीणों में भय व्याप्त है। गंगा नदी के बढ़ते हुए जलस्तर को देखते हुए ग्रामीण बाढ़ की आशंका से अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। आशंका जताई गई कि यदि इसी तेजी से यदि पानी बढ़ता रहा तो पिछले दिनों आए बाढ के सीमा रेखा को पार कर जाएगा। अभी तक तो पूर्व में हुए फसल के नुकसान के नजदीक ही गंगा नदी का जल पहुंचा है। आगे बढ़ने पर किसानों की और फसल के नष्ट होने की संभावना है। बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए विकास खंड कोन के तिलठी और चील्ह में दो बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। पिछले दिनों आए बाढ़ में गंगा के तटवर्ती इलाकों के सैकड़ों एकड़ सब्जी की फसल पानी में जलमग्न होने से नष्ट हो गई थी। जिसमें भिंडी, नेनुआ, लोकी, कोहड़ा , टमाटर की फसल नष्ट हो गई थी। पानी बढ़ने पर बचे फसल के भी नष्ट होने की संभावना है। कोन क्षेत्र के हरसिंगपुर, मल्लेपुर, मलाधरपुर, जगदीश पुर, लखनपुर, मवैया, चील्ह, भटेवरा, मदन पट्टी, दलापट्टी, गड़गेड़ी, रामपुर, देवपरवा सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहले घुसता है। बाढ़ को देखते हुए ग्रामीण भयभीत हैं। सीखड़-विकास खंड में गंगा का पानी मेड़िया से सोनबरसा व खानपुर तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीण सतर्क हो गए हैं और बाढ़ से बचाव की उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है।