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अस्पताल में अग्निशमन यंत्र मौजूद पर रास्ते हैं सीमित

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मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में आग से बचाव के लिए सुरक्षा के इंतजाम तो किए गए हैं, पर आग लगने पर बाहर निकलने वाले रास्ते सीमित और असुरक्षित हैं। यही नहीं लिफ्ट भी खराब है, जर्जर हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि अस्पताल में रास्ते पहले से सीमित थे, ये सब अस्पताल में हो रहे नव निर्माण के चलते हुआ है।
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महाराष्ट्र के भंडारा जिले में एक अस्पताल में आग लगने से सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट के 10 बच्चों की मौत हो गई। मंडलीय अस्पताल के बच्चा वार्ड में अग्निशमन यंत्र मौजूद है। इमरजेंसी और अन्य वार्डोँ में भी आग बुझाने के उपकरण लगे हैं। पर अस्पताल में रास्ते सीमित हैं। अस्पताल में एक समय में सुबह के समय ओपीडी और वार्डों में भर्ती मरीजों को लेकर डेढ़ से दो हजार लोग रहते हैं। पहले अस्पताल में प्रवेश करने और बाहर निकलने के कई रास्ते थे, पर अब रास्ते सीमित हो गये हैं। अस्पताल में प्रवेश करने के दो ही मुख्य मार्ग हैं। इसमें एक अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार और इमरजेंसी की ओर का द्वार है। इसके अलावा बच्चा वार्ड की ओर बाहर निकलने के लिए द्वार है, जो बंद रहता है। पहले एक और रास्ता था जो ग्राउंड, प्रथम और द्वितीय तल को दूसरे छोर पर रास्ता प्रदान करता था, पर एक ओर ग्राउंड फ्लोर पर डायलिसिस सेंटर बन जाने से रास्ता बंद हो गया। ऐसे में आग लगने या अन्य आपदा आने पर मरीजों और तीमारदारों को बाहर निकलने में समस्या होगी।
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