पहले भी लग चुकी है झांकी में आग
मंदिर परिसर में आग लगने की यह कोई नई घटना नहीं है। इसके पहले लॉकडाउन से पूर्व भी मंदिर की झांकी में आग लग चुकी है। एक- दो वर्ष पूर्व मंदिर के पास विद्युत के पैनल में भी आग लग चुकी है। इन सबके मद्देनजर मंदिर प्रशासन द्वारा एंट्रेंस प्लाजा, परिक्रमा पथ, मंदिर प्रांगण सहित विभिन्न स्थानों पर अग्निशमन सिलेंडर और सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं। बुधवार की घटना में यही व्यवस्था प्रभावी साबित हुई। घटना के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर दान पेटिका में रखे आग से प्रभावित नोटों और अन्य सामग्री का आकलन करने में जुट गई।
अधिकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त मुद्रा की गणना की जा रही है तथा नुकसान का विवरण तैयार किया जा रहा है। यह घटना धार्मिक स्थलों पर अग्नि सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दान पेटिकाओं और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास अगरबत्ती, दीपक और कपूर जलाने पर नियंत्रण तथा जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके।
आग बुझाते ही तत्काल दान पेटिका खुलवाकर शुरु हुई नोटों की गणना
विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी मंदिर परिक्रमा पथ पर लगे दान पेटिका में बुधवार की सुबह धुआं उठने व तैनात पुलिसकर्मियों के द्वारा आग बुझाने के बाद सूचना सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह के निर्देश पर नायब तहसीलदार सदर गरिमा यादव ने राजस्वकर्मी के साथ मंदिर प्रांगण पहुंचे तथा दान पेटिका खोला गया। साथ ही मंदिर छत पर दान पेटिका से निकले नोटों की गणना शुरु हो गई। श्री विंध्य पंडा समाज के मुताबिक दान पात्र में पड़े धन को कोई नुकसान नहीं हुआ। समाचार लिखे जाने तक गणना चलता रहा।
दान पेटिका में कोई आग नहीं लगी थी। इसके समीप कुछ श्रद्धालु द्वारा दीपक जलाया गया था। पैसा डालने के लिए दो तरफ छेदा था, एक तरफ धुआं प्रवेश कर दूसरे छिद्र से बाहर आ रहा था। जिसे देखकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी तत्काल आग बुझा दिए। तत्काल दानपात्र खुलवाया गया उसमें पड़े धन सुरक्षित हैं। जिसकी गणना कराई जा रही है। - पंकज द्विवेदी, अध्यक्ष, श्री विंध्य पंडा समाज विंध्याचल।