समाजवादी पार्टी के फैमली ड्रामे ने सबको असमंजस में डाल रखा है। स्थानीय नेता असमंजस में हैं। तय नहीं कर पा रहे हैं कि शिवपाल यादव के गुट के प्रति अपनी भक्ति जताएं या अखिलेश गुट की तरफ। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि दोनों गुटों के वफादार चिह्नित करने में जुटे हैं कि आखिर कौन किसके साथ है। कौन अखिलेश का करीबी है और कौन शिवपाल का। फिलहाल कोई अपनी भावना खुलकर व्यक्त नहीं कर रहा है।
पिछले दो सप्ताह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के बीच उठे राजनीतिक तूफान का असर अब मिर्जापुर में भी दिखाई देने लगा है। कल तक नेता यह कह रहे थे कि स्थानीय स्तर पर पार्टी एकजुट है और कहीं कोई विवाद नहीं है। मगर सोमवार को लखनऊ में आयोजित बैठक के दौरान मंच पर जो हुआ उसके बाद स्थानीय नेता इस बात का आकलन करने लगे हैं कि आखिर किसके साथ उनका भविष्य सुरक्षित होगा। अब उन्हें क्या करना होगा क्योंकि उनको लग रहा है कि ज्यादा समय तक दर्शक की भूमिका में रहना संभव नहीं होगा।
युवा नेताओं का रुझान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को यदि काम करने की पूरी आजादी होती तो आज सूबे की तस्वीर कुछ और होती। अखिलेश प्रदेश को विकास के पथ पर ले जा रहे हैं जबकि कुछ लोग उनकी राह में अड़ंगा लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इस विवाद ने मुख्यमंत्री की छवि को बेहतर बनाया है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस घटनाक्रम को उचित नहीं बता रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी के अंदर विवाद रहा है लेकिन आखिरकार सब एकजुट होकर काम करते रहे हैं। उनका कहना है कि नेताजी को ऐसी व्यवस्था देनी चाहिए, जिसमें सबका सम्मान रहे। बहरहाल पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता असमंजस में पड़ गए हैं।