-मंडियों में 20 रुपये किलोग्राम बिक रहा था टमाटर, अब दो तीन रुपये किलो भी नहीं दे रहे व्यापारी
-टमाटर का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की किसानों ने सरकार से उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी।
मिर्जापुर/सक्तेशगढ़। मंडियों में टमाटर के वाजिब दाम न मिलने से किसान निराश हैं। सीजन के दौरान दाम कम मिलने से किसानों को लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। राजगढ़ की सब्जी मंडी में किसानों को थोक व्यापारी टमाटर के दो से तीन रुपये किलोग्राम भी नहीं दे रहे हैं। इससे टमाटर की खेती स्थानीय किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। राजगढ़ क्षेत्र में 1500 हेक्टेअर जमीन पर टमाटर की खेती हो रही है। हर साल लाखों का कारोबार होता है। लेकिन इस बार वाजिब दाम न मिलने से किसानों में मायूसी है। एक सप्ताह पहले मंडियों में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक टमाटर बिक रहा था। दो-तीन दिनों में राजगढ़ की मंडी में टमाटर के भाव दो से तीन रुपए किलोग्राम हो गया है। किसानों का कहना है कि एक बीघा टमाटर की खेती में खाद, बीज, निराई, गुड़ाई और दवा के अलावा देखरेख के लिए 20,000 रुपये खर्च हो जाता है। टमाटर को तोड़ने में श्रमिकों की प्रतिदिन की मजदूरी 300 रुपये हो रहा है। किसानों की मानें तो यदि टमाटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिके तो भी खर्चा निकलना मुश्किल है। किसानों ने सरकार से टमाटर का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग की है। इसके साथ ही टमाटर की खेती करने वाले किसानों को दवा और खाद पर सब्सिडी की भी मांग की है।
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10 रुपये में डेढ़ किलो बिक रहा टमाटर
जंगीरोड स्थित मंडी में शुक्रवार को टमाटर का फुटकर भाव आठ से 10 रुपये प्रति किलो रहा। छोटे टमाटर 10 रुपये में डेढ़ किलोग्राम के भाव बिक रहे हैं। इससे किसानों में मायूसी है। टमाटर बेचने आए रामदास मौर्य का कहना है कि गर्मी में यही टमाटर 100 रुपये प्रति किलो से पार हो गए थे। आज हालत यह है कि मोटरसाइकिल पर टमाटर लाद कर मंडी में ले आने वाले खुद के लाभ को कौन कहे पेट्रोल तक का खर्चा नहीं निकल पा रहा है।
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मंडी में टमाटर का भाव दो से तीन रुपए किलोग्राम हो जाने से लागत मूल्य तक नहीं निकल पा रहा है। जबकि पांच हजार से लेकर 10000 प्रति बीघा खेत लगाकर टमाटर की खेती की गई है। लागत कैसे निकलेगी इसे लेकर चिंतित हैं।
-प्रशांत कुमार, किसान, धनसिरिया।
बाजार में टमाटर का वाजिब दाम न मिलने से मंडी तक पहुंचने का भाड़ा तक नहीं निकल पा रहा है। बड़े टमाटर खेतों से ही व्यापारी उठा ले जा रहे मध्यम टमाटर खेताें में सड़ रहे हैं। सरकार को टमाटर का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करनी चाहिए।
-राजेंद्र सोनकर, किसान, नदिहार।
मंडी में 60 से 70 रुपये कैरेट टमाटर बिक रहा है। जबकि एक कैरट में 28 किलोग्राम आता है। कटौती करके 25 किलो का ही दाम व्यापारियाें द्वारा दिया जाता है। टमाटर की तुड़ाई तक का दाम नहीं निकल पा रहा है।
-संदीप सिंह, किसान धनसिरिया।
वर्जन
मांग से अधिक मंडियों में टमाटर की खेप पहुंचने से इसकी कीमतें गिर गई हैं। ऐसा प्राय: सीजन में ही देखा जाता है। जिले के साथ ही बाहर से भी टमाटर आ रहे हैं।
-धीरेंद्र गुप्ता मंडी सचिव।