सेरोगेट गाय से अब तक आठ बछिया का हो चुका है जन्म
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित पशुचिकित्सा व पशुविज्ञान संकाय ने स्वदेशी गोवंशीय नस्लों के संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वित्तपोषित सहायक प्रजनन परियोजना को 2022 में शुरू किया था। इससे अब तक आठ बछिया का जन्म हो चुका है। इससे तीन लीटर दूध देने वाली गंगातीरी सरोगेट गाय से 14–16 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन की क्षमता वाली साहीवाल बछिया का जन्म हुआ है।
क्या है ओपीयू–आईवीएफ–ईटी तकनीक
डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि ओपीयू–आईवीएफ–ईटी तकनीक पारंपरिक एमओईटी की तुलना में उत्कृष्ट स्वदेशी पशुओं के तीव्र आनुवंशिक उन्नयन, गुणन एवं प्रसार के लिए अधिक उन्नत व संभावनाशील सहायक प्रजनन तकनीक है। श्रेष्ठ पशुओं से बार-बार अंडाणुओं का संग्रहण, उच्च आनुवंशिक मूल्य वाले एवं सेक्स-सॉर्टेड सीमन का दक्षतापूर्वक उपयोग व अपेक्षाकृत कम अवधि में अधिक संख्या में भ्रूण बन सकेगा। इससे श्रेष्ठ आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। उन्नत जर्मप्लाज्म को व्यापक स्तर पर पशुपालकों तक पहुंचाया जा सकता है। वर्तमान में क्षेत्र में एमओईटी आधारित कार्यों से प्राप्त अनुभव व उपलब्ध आधारभूत संरचना का लाभ उठाते हुए ओपीयू–आईवीएफ–ईटी तकनीक से यूपी के पशुपालकों को उत्तम पशु मिल सकेंगे।