कहां तो तय था चरागां हरेक घर के लिए, कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए । जिले के लिए यह शेर इन दिनों मौजूं साबित रहा है। शासन ने जहां मंडल मुख्यालय के लिए 22 घंटे बिजली देने का फरमान सुनाया था वहीं बिजली विभाग के अधिकारी शासन के इस फरमान को पलीता लगाने में लगे हुए हैं। स्थिति यह है कि दिन ही नहीं रात को भी बिजली मनमाने ढंग से काटी जा रही है। इससे जिले के उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ने लगा है।
चुनावी वर्ष में सरकार ने जहां आम जनता को भरपूर बिजली देने का मन बनाया है वहीं लोकल फाल्ट और अन्य समस्याओं ने गर्मी की शुरुआत में ही शासकीय मंशा पर पानी फेरना शुरु कर दिया है। हालत यह है कि सुबह से रात तक में कई बार बिजली काटी जा रही है। मंगलवार को लगभग पूरे दिन बिजली नदारद रही। दोपहर भर नगर के जेनरेटर धकधकाते रहे। शाम होते ही एक बार फिर बिजली कट गई जो रात साढ़े नौ बजे आई। आधे घंटे रोशनी की चकाचौंध से शहर गुलजार रहा तभी फिर से बिजली कट गई।
आधी रात बिजली आने के बाद बुधवार की भोर में फिर बिजली कट गई। बुधवार को दोपहर लगभग चार घंटे बिजली का इंतजार करते हुए बीता। विभागीय रवैए को देख कर लोग यह कहने लगे हैं कि गर्मी की शुुरुआत में जब बिजली की आवाजाही का यह रुख है तो भीषण गर्मी में क्या हाल होगा यह समझा जा सकता है। शाम को बिजली कटने से जहां उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ रहा है वहीं नया सत्र शुरू होने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।