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बाबा की चौरी पर टेका मत्था

Sat, 21 Nov 2015 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
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कंकरीले-पथरीले रास्ते हों या दुर्गम पहाड़ियां, बेचूबीर बाबा के प्रति श्रद्धा इससे ऊपर है। शुक्रवार की शाम तक बाबा की चौरी पर मत्था टेक हजारों महिलाओं ने मुराद मांगी।

कईयों ने अपने नौनिहालों का मुंडन कराया तो वहीं जन्मजातों को कुछ महिलाओं ने बाबा की चौरी पर भी रख दिया। अंधेरा होने के पूर्व उ.प्र. ही नहीं मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उड़ीसा के कई परिवार बाबा की चौरी पर मत्था टेकने पहुंच गए।
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 श्रद्धालु बाबा की चौरी को एकटक निहारते रहे और इनमें से कई की आंखों से अश्रुधारा बह निकली थी।

बेचूबीर बाबा की चौरी के विषय में ख्याति बिखरी हुई है कि संतान प्राप्ति और प्रेत बाधाओं से मुक्ति अक्षत रूपी चावल के एक दाना प्राप्त कर लेने से पूर्ण हो जाती है।

प्रबोधिनी एकादशी की भोर में मनरी बजने के साथ ही पुजारी द्वारा चिंघाड़ के बाद यह प्रसाद मनरी नामक वाद्ययंत्र की थाप के साथ हवा में उड़ाया जाता है। इस विशेष पूजन में खेलती-हबुआती भीड़ एकाएक शांत हो जाती है।

बाबा की चौरी के चारों ओर लाखों नर-नारी लहरों की तरह लहराते रहते हैं। श्रद्धालु चौरी पर नतमस्तक रहते हैं, जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने सबको एकसूत्र में पिरो दिया है।

 शुक्रवार की सुबह उपजिलाधिकारी चुनार अवधेश मिश्रा, क्षेत्राधिकारी आपरेशन संजय चौधरी, पालिकाध्यक्ष दिलदार अपनी-अपनी टीम के साथ संपूर्ण मेला क्षेत्र में श्रद्घालुुुओं की सुविधाओं के मद्देनजर चक्रमण करते रहे।

आवश्यकता अनुुसार जगह-जगह पेयजल सुविधा मुहैया कराई गई तथा साफ-सफाई और बिजली पर भी विशेष बल दिया गया। महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए पर्याप्त मात्रा में टेंट भी लगे हुए थे।
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 स्वास्थ्य सुविधाओं के मद्देनजर शिविर लगाया गया है, जहां पर मरीजों के बीच नि:शुल्क दवा वितरित किया गया तथा बाबा की चौरी के कुछ दूरी पर अग्निशमन यंत्र का भी प्रबंध किया गया है।
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