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सलामती की दुआ की, दी कुर्बानी

Sat, 02 Sep 2017 11:55 PM IST
mirzapur news
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इबादत
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कुर्बानी का त्योहार इद-उल-अजहा अकीदत के साथ मनाया गया। शनिवार सुबह मस्जिदों व ईदगाहों पर नमाज अदा की गई। मुल्क की सलामती की दुआ मांगी गई। उसके बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। दिन भर कुर्बानी का दौर चलता रहा। मुहब्बत व भाईचारे के त्योहार पर तरह-तरह के व्यंजन बनाए और परोसे गए। नमाज के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैद रहा। रूट डायवर्जन करने के लिए जगह-जगह बैरीकेडिंग की गई थी।
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नगर क्षेत्र के 67 स्थानों समेत जनपद में कुल 277 स्थानों पर नमाज अदा की गई। सुबह से ही सड़कों अकीदतमंद नए परिधान पहनाकर इदगाह व मस्जिदों तक पहुंचे। इमामबाड़ा स्थित ईदगाह पर मौलाना निसार अहमद ने सुबह आठ बजे नमाज पढ़वाई। इस दौरान शांति का पैगाम दिया गया और बकरीद की महत्ता बताई गई। घरों में तरह-तरह के व्यंजन, सेवइयां, सूखे मेवे व फल आदि की व्यवस्था की गई थी। हिंदू भी बधाई देने मुस्लिम भाइयों के घर पहुंचे। घर आए  मेहमानों व दोस्तों का जमकर खातिरदारी की गई।
चुनार संवाददाता के अनुसार नगर के दरगाह शरीफ, मोची टोला में जामा मस्जिद, गोला बाजार में शाही मस्जिद, सरांय, कसाई महाल, गंगेश्वर नाथ समेत अन्य मस्जिदों में नमाज अदा की गई। उसके बाद कुर्बानी का दौर दिन भर चलता रहा। एसडीएम सुनील कुमार मिश्रा, तहसील दार सुरेंद्र बहादुर सिंह व सीओ सुधीर कुमार पूरे समय शहर में भ्रमण करके सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। नगर पालिका ओर से साफ-सफाई व मस्जिदों व सड़कों पर चूने का छिड़काव कराया गया था। अदलहाट संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के गरौड़ी, पथरौरा, भलवां, भुईलीखास, देवलासी, कोल्हुआं, रसूलपुर, बेगपुर, नैठी पचवां, कोलउन्द, छोटा मिर्जापुर,  रसूलागंज, कमालपुर, शाहपुर, निजामुद्दीनपुर, परशुरामपुर  गांवों में सुबह नमाज अदा की गई और कुर्बानियां हुईं। राजगढ़ संवाददाता के अनुसार कुंडरूफ, भावा, देवपुरा, राजगढ़, बिशुनपुर सेमरा बरहो और जिगना संवाददाता के अनुसार विजयपुर विरोही, जोपा, अकोढ़ी, विहसड़ाकला, नरोईया, भांवा, जरैला, मिश्रपुर, गोगांव, हरगढ व कोलेपुर बकरीद की नमाज अदा की गई।
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इद-उल-अजहा पर्व की विशेषता
मिर्जापुर। इमामबाड़ा इदगाह के मौलाना निसार अहमद ने बताया कि मुस्लिम बंधुओं के लिए ईद के बाद बकरीद दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। हजरत इब्राहिम ने अल्लाह को खुश करने के लिए अपने सबसे प्यारे बेटे इस्माइल की कुर्बानी पेश की। मगर चमत्कार हुआ कि इस्माइल बच गए उनके स्थान पर दुम्बा कट गया। हजरत इब्राहिम व इस्माइल की कुर्बानी को अल्लाह ने कबूल किया। तब से कुर्बानी की रवायत चल रही है। आज के दिन गरीबों व असहायों की मदद और माता-पिता, पड़ोसियों व बड़े लोगों का आदर करना चाहिए।
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