अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट देवकांत शुक्ला ने दहेज हत्या के मामले में दोष सिद्ध पाते हुए पति को दस वर्ष की कठोर कारावास तथा सास, ससुर व देवर को सात सात वर्ष सजा सुनाई। उनको जेल भेज दिया गया है। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 16-16 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन अनुसार जिला चंदौली के थाना धीना क्षेत्र के महुंगी निवासी पन्नालाल जायसवाल की अपनी पुत्री प्रीति जायसवाल की शादी पांच मई 2011 को जमालपुर थाना क्षेत्र के मठना गांव निवासी सदानंद जायसवाल के साथ हुई थी। विवाह के कुछ महीनों बाद ही पति सदानंद, ससुर हेमचंद्र, देवर रामानंद, सास गिरजा देवी मिल कर करके उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे।
इसकी सूचना प्रीति ने अपने माता-पिता को दी थी। विवाह के एक वर्ष के उपरांत प्रीति जायसवाल को एक पुत्री पैदा हुई। उसके बाद उसको और भी प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल वालों ने मिलकर 19 मार्च 2014 को उसकी हत्या कर लाश को बगैर मायके वालों को सूचना दिए जला दी। जानकारी होने पर मृृतका के पिता पन्नालाल ने जमालपुर थाने में सभी के खिलाफ 498 ए,304 बी एवं 201 भादवीं धारा 3/4 डीपी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने जांच कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था।
अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश कुमार यादव तथा केके पांडेय ने चार गवाह प्रस्तुत कराये। जिसकी सुनवाई न्यायालय द्वारा बुधवार को की गई। अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली पर उलब्ध्य साक्ष्य के आधार पर मृतका की मृत्यु पति के घर में संदिग्ध अवस्था में हुई है।
उसकी लाश को पोस्टमार्टम से बचाने के लिए जला दिया गया। इस आधार पर न्यायालय ने पति को दस वर्ष तथा सास, ससुर व देवर को सात सात वर्ष के कारवास की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रत्येक को 16-16 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित करते हुए सभी को जेल भेज दिया। अदालत ने अर्थदंड से प्राप्त राशि का 75 प्रतिशत मारी गई महिला की अबोध पुत्री को देने का आदेश दिया है।