मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एक मरीज के तीमारदार द्वारा बाहर से दवा और जांच लिखे जाने की शिकायत किए जाने पर जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने मौके पर मौजूद डाॅक्टरों व अन्य स्टाफ को फटकार लगाई। इसके अलावा निर्माण कार्य में पूर्ण नहीं होने पर राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी को फोन कर फटकार लगाई। उन्होंने लापरवाही बरतने पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की चेतावनी दी। साथ ही मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य को मामले की जांच कर शाम तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी निरीक्षण कर जा रही थीं तो सीसीयू के पास दिनेश अग्रवाल ने शिकायत की कि उनकी सास शकुंतला देवी अस्पताल में भर्ती हैं। एक चिकित्सक द्वारा ईसीजी कराने और कुछ दवाएं बाहर से लाने के लिए पर्ची लिखी गई है। इस दौरान स्टाफ नर्स द्वारा बताया गया कि ईसीजी मशीन वार्ड में रखी गई है, परंतु तकनीकी सहायक के न होने के कारण ईसीजी यहां पर नहीं किया जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने लापरवाही बरतने वालों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की चेतावनी दी। इससे पहले जिलाधिकारी ने पर्ची काउंटर और लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने पर राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी को फोन कर जेल भेजने की चेतावनी दी। जिलाधिकारी ने मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य को अस्पताल में बाहर से दवा लिखे जाने व ईसीजी नहीं होने के मामले की जांच कर शाम तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। आगाह किया कि किसी भी स्तर पर किसी चिकित्सक द्वारा मरीजों को बाहर से दवा की पर्ची नहीं लिखी जाएगी। ऐसी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल ने एसआईसी डाॅ. अरविंद और अन्य स्टाफ के साथ बैठक कर मामले की जांच की। प्राचार्य ने बताया कि जांच के दौरान जानकारी मिली कि शिकायतकर्ता 72 वर्षीय वृद्ध सास को लेकर सुबह छह बजकर 25 मिनट पर अस्पताल आया था। महिला वार्ड में भर्ती किया गया। वहां रेफर करने के लिए हंगामा कर दबाव बनाया। इसके बाद उसे सीसीयू में शिफ्ट किया गया। उससे जन औषधि केंद्र से जीवन रक्षक दवा मंगाई गई थी। अस्पताल में ईसीजी टेक्नीशियन नहीं है। इसलिए 24 घंटे ईसीजी नहीं हो पाती है। जरूरत पड़ने पर डाॅक्टर ईसीजी करते हैं। हज और अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले 400 लोगों की ईसीजी की गई। स्टाफ नर्स द्वारा गलत बताया गया कि कभी ईसीजी नहीं होता है।
जिलाधिकारी डायरिया व बुखार से पीड़ित मरीजों व उनके तीमारदारों के पास जाकर अस्पताल में मिल रही सुविधाओं व इलाज के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सभी चिकित्सकों व मेडिकल स्टाफ को रोस्टर के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचने का निर्देश दिया। प्राचार्य और एसआईसी से उन्होंने कहा कि अस्पताल में आवश्यक दवाएं हर हाल में उपलब्ध होनी चाहिए। कोई भी दवा मरीज को बाहर से लाने के लिए पर्ची नहीं लिखी जानी चाहिए। मेडिकल बोर्ड से आपूर्ति के अतिरिक्त यदि किसी दवा की आवश्यकता होती है तो नियमानुसार पहले से सूची बनाकर खरीदें। उन्होंने बताया कि गर्मी और लू के बीच बीमार मरीजों की भर्ती के लिए मंडलीय अस्पताल में 100 बच्चों को भर्ती करने और वयस्क लिए 50 बेड की व्यवस्था है। सभी वार्डों में एसी, कूलर, पंखे लगाए गए हैं। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। इस दौरान प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल, एसआईसी डाॅ. अरविंद सिंह, प्रबंधक अनुज ठाकुर, प्रदीप त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
.