मिर्जापुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तीन दिन पारिवारिक न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें तीन दंपती समझाने के बाद साथ रहने के लिए राजी हो गए। पर चार में सुलह नहीं हुआ और वे अलग हो गए।
जनपद न्यायाधीश लालचंद्र गुप्ता के आदेश पर महिला पखवारा के तहत महिलाओं के पारिवारिक मामलों के निस्तारण के लिए दो से सात मार्च तक लोक अदालत का आयोजन हुआ। पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने लोक अदालत में सुलह समझौता के आधार पर रिता देवी पत्नी चंद्रदीप, गीता देवी पत्नी बब्बू और मीरा देवी पत्नी भानू मिश्रा को साथ रहने के लिए राजी किया। अनिता मौर्या पत्नी सूरज मौर्या, शीला पत्नी अमरनाथ, सत्यमिंदर पत्नी विनय कौर और अमर नाथ पत्नी शीला ने सुलह के माध्यम से विवाह-विच्छेद कर लिया। एकमुस्त भरण-पोषण राशि दिलाया। बताया कि महिलाओं के पारिवारिक मामलों में प्रतिदिन न्यायालय समय में काउंसिलिंग सुलह-समझौता वार्ता कराई जाती है। पूर्ण कालिक सचिव अमित कुमार यादव द्वितीय ने पति-पत्नी को एक साथ रहने का सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक घर में विवाद होते रहते हैं। उसे दिल से नहीं लगाना चाहिए। विवाद हो तो आपस में बैठकर सुलझाना चाहिए। इस दौरान वरिष्ठ सहायक दीपक श्रीवास्तव आदि लोग रहे।