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रोग लगा फैलने, प्रशासन फेल

Tue, 30 Aug 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
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‌कीचड़ और गंदगी
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बाढ़ के  पानी के वापस गंगा में जाते ही प्रशासनिक विफलता उजागर होने लगी है। गंगा की गाद के सूखने के साथ ही गांवों में दुर्गंध और महामारी की स्थिति व्याप्त होती जा रही है। कुछ गांवों को छोड़ दिया जाय तो सरकारी मशीनरी ब्लीचिंग पावडर और फागिंग कराने में नाकामयाब साबित हुई है। सफाईकर्मी तो गांवों में बीते एक पखवारे से नहीं दिखे हैं।
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जिले के गांवों में 16 अगस्त से बाढ़ ने दस्तक देना शुुरु कर दिया था। दस दिनों तक गांवों में तबाही मचाने के बाद दो-तीन दिनों से गंगा का पानी वापस गंगा में जाने लगा है। इससे ग्रामीणों को राहत तो मिली लेकिन अब गंगा की गाद के सूखने से गांवों में दुर्गंध का ऐसा आलम छाया है कि लोग बिना नाक पर रुमाल रखे चल नहीं पा रहे।  प्रशासनिक लापरवाही कोढ़ में खाज का काम कर रही है।


लिंक मार्ग बह गए हैं जिससे आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चुनार के सरैया, ऐबकपुर मोहना, बघेड़ी, गांगपुर,  बसारतपुर आदि गांवों में न तो प्रशासन की तरफ से फागिंग कराई गई है और न ही ब्लीचिंग पावडर का ही छिड़काव कराया गया है। सर्वाधिक दिक्कत स्वच्छ पेयजल की है।
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 सीखड़ विकास खंड के मेड़िया गांव में तो डीडीटी का छिड़काव तो कराया गया है लेकिन खैरा,पचराव, फुलहा, प्रेमापुर, रामगढ़, बिदापुर में न तो सफाईकर्मी पहुंचे हैं और न ही डीडीटी का छिड़काव किया गया है, जबकि बीडीओ बागीश शुक्ल ने पहले ही जरूरी दवाइयों के छिड़काव का आदेश दिया था। कछवां के बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाये गए बाढ़ चौकियों पर से अधिकारी और कर्मचारी गायब हैं। यहां भी अभी डीडीटी का छिड़काव और फागिंग नहीं कराई गई है।


 जिगना के काशीसरपत्ती को छोड़ कर अन्य स्थानों पर डीडीटी का छिड़काव नहीं हुआ है। विन्ध्याचल में गोसाईपुरा, कारगिल बस्ती,बनारस बस स्टैंड, गोपीगंज बस स्टैंड, नचनियाबीर आदि इलाकों के लोगों को अभी भी इंतजार है कि प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी आएंगे और रोगों की रोकथाम के लिए जरूरी दवाइयों का छिड़काव करेंगे। चेतगंज में मिश्रधाप को छोड़ कर अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव नहीं हुआ है। इलाके में पीने की पानी और चारे की किल्लत है।
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