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किसानों ने दिखाई सक्रियता, बचाई मिर्च की नर्सरी

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मेंड़बंदी
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विकास खंड सीखड़ में बाढ़ की विभीषिका के चलते जहां मिर्च की खेती चौपट हो गई लेकिन तमाम किसानों ने अपनी सूझबूझ से मिर्च की नर्सरी बचाने में कामयाबी हासिल की है। युवा किसानाें ने जेसीबी के माध्यम से आठ फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी। इससे बाढ़ का पानी उनके खेत तक नहीं पहुंचा और मिर्च के बेहन को बर्बाद होने से बच गई।क्षेत्र के जिन  किसानों ने मिर्च की खेती अगस्त महीने में की थी उनकी फसलें गंगा की बाढ़ के चलते नष्ट हो गई। इससे उनको काफी नुकसान उठाना करना पड़ा।
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विकास खंड सीखड़ के अधिकांश किसानों द्वारा मिर्च की खेती की जाती है। मिर्च के बेहन को बाढ़ से बचाने के लिए विकास खंड सीखड़ के युवा किसानों ने जेसीबी के माध्यम से आठ फीट ऊंची दीवार खड़ी करके लाखों रुपये के मिर्च के बेहन को चौपट होने से बचा लिया। क्षेत्र के खैरा, बगहां, पचरांव, बटउआ आदि गांवों में किसानों ने जेसीबी मशीन से मिट्टी की खुदाई करा कर उससे आठ फीट ऊंची दीवार बनाई, जिससे गंगा का पानी मिर्च के बेहन के मेड़बंदी के अंदर नहीं पहुंच पाया।

क्षेत्र के किसान प्रमोद सिंह, उमेश पंाडेय, भागवत सिंह, राजेश तिवारी, रमेश सिंह, फूलगेन सिंह, जितेंद्र सिंह, अतुलमान सिंह, राजेश्वर सिंह, दिनेश सिंह का कहना है कि अगस्त माह में काफी मंहगे बीज से मिर्च की खेती की गई थी, लेकिन बाढ़ आने के बाद खून पसीने की कमाई गंगा में समाहित हो गई। वहीं युवा किसानाें ने जेसीबी के माध्यम से आठ फीट ऊंची दीवार खड़ी कर अपने मिर्च के बेहन को बचा लिया।
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  विकास खंड खैरा के किसान भागवत सिंह ने बताया कि क्षेत्र में करीब 15 हजार बीघे खेत में मिर्च की खेती की जाती है। यहां से उसे वाराणसी मंडी में भेजा जाता है। वहां से देश के अलग-अलग हिस्सोें में मिर्च की आपूर्ति की जाती है, लेकिन विगत दिनों गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण तटवर्तीय इलाके में बोई गई मिर्च की खेती पर असर पड़ा है।
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