सूर्य उपासना का महापर्व डाला छठ नहाय खाय के साथ 24 अक्तूबर से आरंभ हो रहा है, लेकिन पालिका प्रशासन की ओर से घाटों पर फैली गंदगी को हटवाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। गंगा का पानी घटने के बाद घाटों पर शिल्ट जमा हो गई है। उन्हें भी नहीं हटवाया नहीं जा रहा है। ऐसे में व्रती महिलाओं को गंगा स्नान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। शिल्ट से महिलाओं को घाटों पर स्नान के दौरान फिसलने का भय भी बना हुआ है।
मंगलवार की भोर से ही नगर के विभिन्न घाटों पर स्नान के लिए महिलाओं की भीड़ आनी शुरू हो जाएगी। नहाय खाय के साथ ही डाला छठ का पर्व आरंभ हो जाएगा। लेकिन गंगा घाटों की बात करें तो अधिकांश घाटों पर दुर्व्यवस्था का आलम बना हुआ है, जिससे महिलाओं को गंगा स्नान करने में खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
महिलाओं के वस्त्र बदलने का भी उत्तम प्रबंध नहीं किया गया है। गंगा घाटों पर चारों ओर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। नगर के बरियाघाट में नगर पालिका प्रशासन द्वारा गिराए गए कुड़े से दुुर्गंध उठ रही है। पर्व पर व्रती महिलाएं गंगा स्नान करने के पश्चात सूर्य भगवान की उपासना करती हैं।
नगर के बरियाघाट, कचहरी घाट, फतहां घाट, सुंदर घाट, बदली घाट, बाबा घाट, दाऊ जी घाट, पक्का घाट, संकठा घाट, नारघाट समेत विंध्याचल के घाटों पर तमाम प्रकार की खामियां है। टूटी सीढ़ियों की भी मरम्मत नहीं हो पाई है, ऐसे में व्रती महिलाओं को गंगा स्नान के लिए आने व जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। विधि विधान से पूजा पाठ करने में महिलाओं को देर शाम हो जाती है, ऐसे में घाटों पर उचित प्रकाश न होने से काफी दिक्कत होगी।