शिवमहापुराण की कथा सुनाते पवन महाराज
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लालगंज। तेंदुई गांव स्थित जानकी कुंज दुर्गा मंदिर में चल रही शिवपुराण कथा के छठवें दिन सोमवार को महाराज पवन ने श्रोताओं को नारद, पार्वती, मैना और शिव विवाह के प्रसंगों का रसपान कराया।
उन्होंने बताया कि देवर्षि नारद ने पार्वती जी को शिव को पाने के लिए तपस्या करने की सलाह दी। नारद की बात सुनकर पार्वती ने मन ही मन शिव को पति रूप में स्वीकार कर तपस्या के लिए निकल पड़ीं। जब यह बात माता मैना को पता चली तो उन्होंने बेटी की कठिन तपस्या पर सवाल उठाते हुए उसे रोकने का प्रयास किए।
पार्वती ने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए। उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। रावण की शिवभक्ति का प्रसंग भी कथा में सामने आया।
इसमें हिमवान और मैना के आशीर्वाद के साथ शिव-पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ। शिव बरात लेकर हिमालय पहुंचे जहां शिव के भूत-प्रेतों से सजी बरात को देखकर मां मैना घबरा गईं।
नारद मुनि के समझाने पर सबने शिव को स्वीकार किया। इसमें आयोजन समिति के अशोक तिवारी, नवीन तिवारी, चंद्रदत्त त्रिपाठी, प्रभुनाथ दूबे, विनोद तिवारी आदि रहे।