गंगा घाटों पर चारों तरफ फैले मिट्टी के अंबार को देख यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि छह दिन के अंदर गंगा घाटों की व्यवस्था में सुधार कैसे हो पाएगा।
मात्र सात दिन बाद शारदीय नवरात्र शुरू हो रहा है, लेकिन विंध्य क्षेत्र में मेले की तैयारी अत्यंत धीमी गति से चल रही है, जिसका खामियाजा देश के कोने-कोने से आने वाले माता के भक्तों को भुगतना पड़ेगा।
धाम क्षेत्र की गलियों में मरम्मत कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है, जिसके कारण भक्तों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
विंध्याचल के गंगा घाट पर इस बार शारदीय नवरात्र में स्नान करने में स्नानार्थियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
गंगा घाटों पर न तो प्रकाश व्यवस्था का कार्य शुरू हो पाया है और न ही मिट्टी नके अंबार को ही हटवाया जा रहा है। घाटों की सीढ़ियों पर लगे मिट्टी को नहीं हटवाए जाने से स्नान करने वाले भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मेले की तैयारी के नाम पर जेसीबी मशीन से मिट्टी को एक स्थान से हटा कर दूसरे स्थान पर रख दिया जा रहा है।
न तो घाटों की सीढ़ियों की धुलाई हो रही है और न ही कूड़ा-करकट ही हटवाया जा रहा है। विंध्याचल के पक्काघाट, गुदाराघाट, कच्चाघाट, बलुआघाट, दीवानघाट, इमलीघाट पर मिट्टी का अंबार लगा हुआ है, जिससे स्नान करने में स्नानार्थी परेशान होंगे। गंगा घाटों पर न तो कपड़े बदलने के लिए कोई स्थान बनवाया जा रहा है और न ही साफ-सफाई व प्रकाश की व्यवस्था दिखाई दे रही है। गंगा घाटों के अलावा विंध्याचल की कई गलियों में अभी भी मरम्मत कार्य आरंभ नहीं हो पाया है, जिसका खामियाजा नवरात्र में भक्तों को भुगतना पड़ेगा।
विंध्य क्षेत्र के भट्ट जी गली सहित रेलवे स्टेशन से मंदिर जाने वाली गली, बावली चौराहा गली, मोतीझील मार्ग, निहूत महावीर जी गली, बंगाली चौराहा से रेहड़ा चुंगी, घसियारी गली सहित कई अन्य गलियों की दशा अत्यंत दयनीय हो चुकी है।
अगर समय रहते विंध्याचल के प्रमुख गंगा घाटों व धाम क्षेत्र के गलियों की दशा में सुधार नहीं कराया गया तो श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।