लालडिग्गी पर खोदा गया सीवर का गड्ढा, स्रोत संवाद
मिर्जापुर। नगर में 204 करोड़ रुपये की लागत से चल रही सीवर परियोजना निर्धारित समय के दो वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। वर्ष 2021 में शुरू हुई इस परियोजना को वर्ष 2024 तक पूरी होनी थी लेकिन निर्धारित तिथि के बाद भी यह पूरी नहीं हो सकी। नगर में कई जगहों पर खोदे गए बड़े- बड़े गड्ढों से आवागमन तो बाधित हो ही रहा है। आसपास के घरों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। इस समय नगर में चार जगहों, लालडिग्गी, मुकेरी बाजार, लोहिया तालाब व एक अन्य जगह पर गहरा गड्ढा खोदकर काम चल रहा है। यह आलम तब है जब जिलाधिकारी ने भी कुछ दिन पहले ही 31 दिसंबर तक काम पूरा करने की चेतावनी दी थी।नगर में अमृत योजना के तहत हर घर को सीवर से जोड़ने के लिए वर्ष 2021 में सीवर परियोजना शुरू की गई। इसके तहत पूरे नगर में 210 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाकर उसको हर घर से जोड़ा जाना था। इसके लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। काम शुरू होने के बाद इसको वर्ष 2024 में पूरा कर नगर पालिका को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव था। इसके लिए पूरे नगर में सड़कों को खोदकर सीवर लाइन बिछाई गई लेकिन काम की गति इतनी धीमी रही कि निर्धारित समय तक इसका 60 प्रतिशत ही काम पूरा हो सका। इसके बाद इसका समय फिर से बढ़ाया गया और जून 2025 तक किया गया। इस तिथि पर भी काम पूरा नहीं हो सका। फिर समय बढ़ाया गया। दिसंबर 2025 में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने निरीक्षण किया और 31 दिसंबर की डेडलाइन तय की लेकिन यह समय भी बीत गया और काम पूरा नहीं हो सका।
बरसात में समस्या होने पर विधायक रत्नाकर मिश्र ने दी थी चेतावनी-मिर्जापुर। बरसात में लालडिग्गी में खोदे गए गड्ढे में पानी भर जाने से आसपास के मकानों के गिरने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। उस समय नगर विधायक रत्नाकर मिश्र ने निरीक्षण किया था और कार्यदायी संस्था के अभियंता को चेतावनी दी थी। इसके बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। डीएम व अन्य अधिकारियों ने भी काम में तेजी लाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। नतीजा, प्रतिदिन जाम लगना, कहीं दरार आना आदि समस्याएं हो रही हैं। संवाद
काम लगभग पूरा हो चला है। 10- 15 दिनों में काम पूरा हो जाएगा। सघन आबादी वाले क्षेत्रों में गड्ढा खोदकर अंदर से पाइप डाला जा रहा है। रास्ते में पत्थर आ जाने से समस्या हो जाती है। इससे विलंब होता है। अब शीघ्र ही कार्य पूरा हो जाएगा। - अरविंद कुमार, अधिशासी अभियंता गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई