दीपावली की शाम ढलते ही लोगों ने अंधकार को खदेड़ दिया। लोगों के जोश के आगे अंधेरा हार गया। पूरा शहर दीपों से जगमग हो उठा। प्रकाश पर्व पर हर ओर उल्लास का वातावरण रहा। घरों एवं प्रतिष्ठानों पर लगे रंग-बिरंगी झालरों की छटा बिखरी ऐसी बिखरी कि मन प्रफुल्लित हो उठा। लोगों ने लक्ष्मी-गणेश को पूजकर समृद्धि की कामना की। खूब आतिशबाजी की गई।
सूर्यास्त होने के लोगों ने दीपों की रोशनी से अमावस की काली रात को जगमग कर दिया। बाजार, घर-आंगन, मंदिर, घाट रंगबिरंगी रोशनी से जगमगा उठे। पूरा शहर ऐसे जगमगा रहे थे मानो आसमान के तारें लोगों की घरों में उतर आए हों। रंग बिरंगे झालर व फैंसी दीप लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। शाम को मुहूर्त घरों और प्रतिष्ठानों में गणपति और महालक्ष्मी पूजी गईं। देर रात तक उपहार भेंट शुभकामनाएं देने का दौर चलता रहा। जमकर आतिशबाजी की गई। जुए की फड़ पर हजारों रुपये के दांव लगाए गए।
दीप पर्व को लेकर पूरे जनपद में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। अल-सुबह जहां घरों में रंग-रोगन का काम पूरा कर आकर्षक रंगोली सजाने में महिलाएं व युवतियां जुटी रहीं, वहीं रंग-बिरंगे झालरों से घरों को सजाने का कार्य सांयकाल तक चलता रहा। बच्चों के चेहरे फूलझड़ी-चरखी की रोशनी जलाकर खिले नजर आए, वहीं जगमग रोशनी से नहाए घर आंगन की छटा देखते ही बन रही थी। आतिशबाजी-पटाखे छोड़ने का सिलसिला देर रात तक अनवरत चलता रहा।
रंग-बिरंगी फूलझड़ी, राकेट, चरखी और बुलेट बम से चारों दिशाएं गूंज उठी। सांयकाल लोगों ने अपने-अपने घरों व प्रतिष्ठानों में विधिवत लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्घि की कामना की। मोबाइल से एक दूसरे को दीप पर्व की बधाई देने का सिलसिला देर रात तक अनवरत चलता रहा।
महिलाएं व बालिकाएं घरों के बाहर आकर्षक रंगोली बनाकर उस पर दीपक जलाकर पर्व मनाया। लोगों ने सांयकाल परंपरा अनुसार देव स्थलों पर दीपक जलाकर मंगलकामना की। शाम को चारों तरफ झालरों की लड़ियां सहित जलते दीपों की श्रृंखला दिखाई दे रही थी। देर रात तक आसमान में रंग-बिरंगे आतिशबाजी तैरते दिखे, वहीं बच्चे पटाखे, आतिशबाजी छोड़कर खुशी से उछलते नजर आए।