बाढ़, धूप और उमस से जीवाणु और विषाणु तेजी से पनप रहे हैं और लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से अस्पतालों में रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। दो दिनों से रोजाना मंडलीय चिकित्सालय में दो से ढाई हजार रोगी आ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए बिस्तर नहीं है। पूरा परिसर मरीजों से पट गया है। लोगों जमीन पर और स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज करना पड़ रहा है।
उमस भरा मौसम होने के चलते इन दिनों बीमारियां भी बढ़ गई हैं। लोग उल्टी, दस्त, बुखार, मलेरिया, डायरिया, टायफायड, सर्दी-जुुुकाम आदि रोगों के शिकार हो रहे हैं। प्रतिदिन जिला चिकित्सालय में दो हजार मरीज अपना इलाज कराने आ रहे हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 30 से अधिक मरीजों की हालत गंभीर होने पर भर्ती करना पड़ रहा है। सोमवार को 1316 पुरुष व 1117 महिला और मंगलवार को 950 पुरूष तथा 900 महिला मरीज अस्पताल के बहिरंग विभाग में पहुंचे।
155 वेडों वाले मंडलीय चिकित्सालय के सर्जिकल वार्ड दुर्घटना के शिकार लोगों से भरा है। वहीं मेडिकल व महिला वार्ड में बीमार मरीज भर्ती किए गए हैं। बर्न वार्ड भी भरा हुआ है। सबसे खराब स्थिति चिल्ड्रेन वार्ड की है, जहां एक बेड पर तीन-तीन बच्चों का इलाज किया जा रहा है। अधिक मरीज भर्ती होने के कारण कर्मचारियों को इलाज करने में पसीने छूट जा रहे हैं, लेकिन स्टाफ नर्स व एएनएम एक अन्य संस्था की आई महिला कर्मचारियों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है।
फार्मासिस्टों की हड़ताल की वजह से मंगलवार की शाम को कई वार्डों में दवाओं की किल्लत हो गई थी जबकि लैब टेक्निशियनों ने जांच का काम ठप रखा।