शासन के 45 दिन में निस्तारण के निर्देश के बावजूद, एक-दो कार्यदिवस में होने वाले काम सालों से अधूरे
मड़िहान और भदोही तहसीलों के निरीक्षण में कई खामियां, पांच साल से अधिक पुराने वाद भी मिले
एडिशनल कमिश्नर ने खामियों को बताया नियमों के विरुद्ध
भदोही तहसील में 14 मामले भी पाए गए, जो पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।
मिर्जापुर। मेड़बंदी और भूमि सीमांकन के लिए मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में रोज विवाद हो रहे हैं। वहीं, शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद तहसीलों में धारा 24 के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामले महीनों और वर्षों से लंबित हैं।
अपर आयुक्त प्रशासन, विंध्याचल मंडल, राज कुमार द्विवेदी के निरीक्षण में भदोही और मड़िहान तहसीलों में गंभीर लापरवाही सामने आई है। निरीक्षण रिपोर्ट में ऐसे कई वाद दर्ज मिले हैं, जो पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं और जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शासन के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी के कारण फरियादियों को वर्षों से न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। मिर्जापुर और भदोही जिलों की तहसीलों में भूमि विवाद से जुड़े मामलों की संख्या अधिक है। थानों में भी भूमि पैमाइश और मेड़बंदी के लिए मारपीट और झगड़े के मामले अक्सर सामने आते हैं। जमीन विवाद के कई मामलों में गंभीर वारदातें भी हो जाती हैं। कमिश्नर विंध्याचल मंडल के निर्देश पर एडिशनल कमिश्नर ने भदोही और मड़िहान तहसीलों का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
निरीक्षण में सामने आया है कि भदोही तहसील में उपजिलाधिकारी न्यायालय में धारा 24 के लिए अलग रजिस्टर बनाए गए थे। इन रजिस्टरों में 446 वाद दर्ज पाए गए। इन मामलों को नियमों के विरुद्ध आरसीसीएमएस पोर्टल पर दर्ज किए बिना ही प्रारंभिक आख्या के लिए तहसीलदार को भेज दिया गया था। रजिस्टर में दर्ज 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में छह महीने से लेकर दो वर्ष तक का समय बीतने के बावजूद आख्या न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई। उपजिलाधिकारी न्यायिक भदोही, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के न्यायालयों में भी स्थिति इसी प्रकार पाई गई। मड़िहान तहसील में एसडीएम न्यायालय के रजिस्टर में धारा 24 के कुल 230 वाद दर्ज मिले। इन मामलों को भी नियमों की अनदेखी करते हुए बिना पोर्टल पर दर्ज किए तहसीलदार के पास भेजी गई। छह महीने से लेकर दो वर्ष तक का समय बीतने के बाद भी 90 प्रतिशत मामलों की आख्या तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई।
क्या कहते हैं नियम
राजस्व संहिता नियमावली के अनुसार, सीमांकन का आवेदन प्राप्त होते ही उसी दिन या अगले कार्यदिवस में उपजिलाधिकारी राजस्व न्यायालय आरसीसीएमएस पोर्टल पर वाद दर्ज करेगा। राजस्व निरीक्षक को 30 दिनों के भीतर सीमांकन आख्या फील्ड बुक के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करनी होती है। उपजिलाधिकारी को 45 दिनों के भीतर मामले का निस्तारण करना होता है।
कोट
“तहसीलों के निरीक्षण में नियमों की घोर अनदेखी सामने आई। शासन के निर्देशों का पालन नहीं पाया गया। सभी को निर्देश दिया गया था कि खामियों को दूर कर वादों का नियमानुसार निस्तारण कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करें, लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।”
— राज कुमार द्विवेदी, अपर आयुक्त प्रशासन, विंध्याचल मंडल