कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। स्टेट बैंक को छोड़कर अन्य सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज ठप रहा। इसके चलते करीब 80 करोड़ रुपये के चेक की क्लीयरिंग नहीं हो पाई और 150 करोड़ रुपये के आसपास का नकद लेनदेन प्रभावित हुआ। डाक विभाग में हड़ताल के चलते लोग खत तक नहीं भेज पाए। आयकर विभाग में भी कामकाज ठप रहा।
बैंक कर्मचारियों की दोनों प्रमुख यूनियनों एआईबीईए एवं एआईबीओए के हड़ताल में शामिल होने के कारण बैंकों का कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बैंककर्मियों ने इलाहाबाद बैंक की डंकीनगंज शाखा के सामने गिरिजा शंकर सिंह की अध्यक्षता में प्रदर्शन किया । इस मौके पर जिला मंत्री सुरेश पांडेय ने कहा कि आउटसोर्सिंग के जरिए सरकार बैंकों का निजीकरण कर रही है। पूंजीपतियों के दबाव में सरकार श्रम कानून में संशोधन कर श्रमिकों के अधिकार को समाप्त करना चाहती है।
उन्हाेंने कहा कि बैंक व रेलवे सुरक्षा के क्षेत्रों में असीमित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की छूट न तो श्रमिक हित में है और न ही देश हित में। बैकों का13 लाख करोड़ पूंजीपतियों के पास फंसा हुआ है। इसकी वसूली के लिए कड़े कानून बनाने के बजाय सरकार बकाएदारों को रियायत देने में लगी है। उ.प्र. राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष लल्लू तिवारी एवं सीपीएम के साथ अनुज प्रताप सिंह एवं अरविंद कुमार भी हड़ताल को समर्थन देने पहुंचे।
बैंककर्मियों ने मोटरसाइकल जुलूस निकाला और विभिन्न बैंक शाखाओं में भ्रमण किया। आंदोलन में ब्रम्ह सिंह, गिरिजा शंकर सिंह, जगदीश उपाध्याय, विकास कुमार, मूलचंद्र मिश्र, लक्ष्मी नारायण, गोपाल दास, बदरूद्दीन, विष्णु केशरवानी, मोहित जायसवाल, अनुज सिंह, राम नारायण, केशव प्रसाद, रमाशंकर जायसवाल, धनंजय राय, घनश्याम शामिल रहे। उ.प्र. मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन ने जुलूस निकाला और डीएम को 12 सूत्री ज्ञापन अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव, हसन अंसारी, विजय मिश्र, संजय यादव, अभय खत्री, पंकज जायसवाल, अजय खत्री मौैजूद रहे।