मिर्जापुर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट भगवती प्रसाद सक्सेना ने सुनवाई के दौरान दोष सिद्घ होने पर शुक्रवार को पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
अभियोजन अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के रामबाग निवासी एवं वादी मुकदमा भगत पुत्र लौटन ने पांच जून 2006 को इस आशय का प्रार्थना-पत्र दिया था कि छोटे साढ़ू लाले की पत्नी तेजा धईकार करीब पांच वर्षों से अपने पति लाले को छोड़ कर छोटा मिर्जापुर निवासी इरफानी पुत्र मोहम्मद असफाक खान के साथ शादी कर रह रही थी। एक साल से इरफानी व तेजा में प्रतिदिन लड़ाई होती थी। 5 जून 2006 को तेजा जली हालत में जिला अस्पताल में भर्ती हुई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। तेजा नई बस्ती बस स्टेशन के पीछे किराए के मकान में इरफानी के साथ रहती थी।
आरोप था कि कि इरफानी ने तेजा को जलाकर मार डाला। तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर विवेचना करते हुए धारा 302 व एससी-एसटी एक्ट के तहत कोतवाली कटरा में मुकदमा दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से अभियोजनाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने सभी गवाहों की गवाही ली और तर्क दिया कि अभियुक्त द्वारा अनुसूचित जाति की सदस्या मृतका तेजा की निर्मम हत्या की गई। ऐसे में उसे कठोर सजा एवं जुर्माने से दंडित किया जाए। अधिवक्ताओं की दलील पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई की। न्यायालय ने दलित महिला तेजा धईकार की जलाकर हत्या करने का जुर्म सिद्घ पाया और इरफानी पुत्र मोहम्मद असफाक खान को आजीवन कारावास की सजा के साथ दस हजार रुपये जुर्माने से दंडित कर जेल भेज दिया।
हत्या के जुर्म में एक को उम्र कैद, दस हजार जुर्माना