कछवां। कोरोनो के दूसरे दौर में ग्रामीण इलाकों में संक्रमण ज्यादा देखा जा रहा। काफी संख्या में लोगों की मौत हुई और लोग बीमारियों की चपेट में आए, पर जांच कराने के लिए अब भी कम ही लोग स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंच रहे। इस कारण अन्य लोग भी चपेट में आते जा रहे हैं। स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के लिए निगरानी समिति का गठन किया है, पर ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल सका।
मझवां विधान सभा और कछवां क्षेत्र के बरैनी में तेज रफ्तार से बीमारी फैल। लक्षण तो कोरोना जैसे हैं पर प्रशासन के आंकड़ों से यही लगता है कि वह कोरोना नहीं बल्कि कुछ और बीमारी मान रहा। हालात ये है कि लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण दहशत में हैं। यह हालात पंचायत चुनाव के बाद बिगड़े। सरकारी आंकड़ों में भले ही मौत दर्ज न हो पर बरैनी गांव में हाल ही में इस डेढ़ माह केे संक्रमण में 35 से अधिक लोगों की कोरोना और कोरोना के लक्षण जैसी बीमारी के चलते मौत हुई बताई जा रही। बड़ी संख्या में मौत से पूरा गांव सदमे में हैं। गांव के लोग तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। इसके अलावा आश्चर्यजनक है कि कोरोना जैसे लक्षण होने के बावजूद ज्यादातर लोग जांच कराने से बच रहे हैं। लोग झोलाछाप से उपचार कराने, देशी नुस्खों का प्रयोग करते हुए पूजा पाठ पर जोर दे रहे हैं। कुछ ही लोग हैं, जो मेडिकल स्टोरों से दवाई खरीदकर कोरोना से जंग लड़ रहे हैं