पतित पावनी गंगा की तेज धार देख तटवर्तीय इलाके के लोगों को एक बार फिर बाढ़ की चिंता सताने लगी है।
बुधवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 74.080 रिकार्ड किया गया, जबकि खतरे का निशान 77.762 है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से जहां एक ओर कटान तेज हो गया है, वहीं घाटों की सीढ़ियां व प्राचीन मंदिरों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
गंगा के जलस्तर को देख तटवर्तीय के लोग बाढ़ से निपटने के लिए अभी से ही तैयारी भी शुरू कर दिए हैं। पलायन की कई गांवों में तैयारी है।
विगत कई दिनों से गंगा के जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी से जनपद के तटवर्तीय इलाकों में बसे गांव के ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है।
गंगा जलस्तर बढ़ने से जहां एक ओर गंगा किनारे बोई गई अरहर, बाजरा, उड़द, मूंग, मुंगफली, तिल्ली सहित कई सब्जियों की खेती बर्बाद होने के कगार पर हैं, वहीं झुग्गी-झोपड़ी भी गंगा में समाहित होने लगे हैं।
गंगा की तेज धार को देख जनपद के छानबे, कोन, पड़री, चुनार, सीखड़ के किसान चिंतित नजर आने लगे हैं।
जिला प्रशासन की लाख कवायद के बाद भी गंगा में ओवरलोड नावों के संचालन पर रोक नहीं लग पा रहा है।
शुक्रवार को भी नगर के विभिन्न घाटों से गंगा में ओवरलोड नावों का संचालन होता रहा।
गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोत्तरी से कटान भी तेजी से होने लगा है, जिससे गंगा किनारे स्थित प्राचीन मंदिर व घाटों के अतिस्तत्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर के बरियाघाट सहित कई अन्य घाटों पर गंगा का जलस्तर देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे, वहीं सावन मास के प्रथम सोमवार को देखते हुए घाटों पर बैरिकेडिंग आदि की भी व्यवस्था कराई जा रही थी।
जिला प्रशासन तो बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी पूर्ण करने का दावा कर रही है, लेकिन यदि गंगा के जलस्तर में ऐसे ही बढ़ोत्तरी होती रही तो गंगा के तटवर्तीय इलाके में बसे बसे गांव के लोगों को बाढ़ कर कहर झेलना पड़ सकता है।