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बच्चे पूछ रहे पापा कब जमा होगी फीस

Wed, 16 Mar 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
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केंद्र सरकार द्वारा सराफा व्यवसायियों पर लगाए गए एक्साइज टैक्स के विरोध में चल रहे अनिश्चितकालीन हड़ताल से सराफा कारीगर बेकाम के हो गए हैं। सराफा व्यापार मंडल मिर्जापुर की ओर से चल रहे सराफा व्यवसायियों के हड़ताल के कारण कारीगरों को कोई काम नहीं मिल रहा है, जिसके चलते उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है।
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रोज कमाकर खाने वाले कारीगरों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनके बच्चे अब यह पूछने लगे हैं कि पापा आखिर फीस कब जमा करेंगे।  


आल इंडिया सराफा व्यापार एसोसिएशन एवं उ.प्र. सराफा व्यापार एसोसिएशन के आहवान पर सराफा व्यवसायियों के चल रहे हड़ताल के 15 वें दिन कारीगरों में मायूसी छाई रही। कामकाज विगत 15 दिन से ठप होने से सराफा कारीगरों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।


कारीगर रोज इसी उम्मीद के साथ निकलते हैं कि शायद आज काम चालू हो जाए, लेकिन हड़ताल जारी होने के कारण कोई काम नहीं मिल रहा है, ऐसी स्थिति में जब सांयकाल कारीगर अपने घरों को जाते हैं तो बच्चे पूछते हैं कि पापा जी आखिर स्कूल की फीस कब जमा करेंगे, यह सुनकर कारीगरों की आंखें नम हो जा रही हैं। नगर के बसनही बाजार, बड़ी माता की गली, चुन्नी मुन्नी की गली, नबालक का तबेला, पसरहट्टा बाजार एवं गणेशगंज में बड़ी संख्या में सराफा कारीगरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
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पड़री के मोहनपुर निवासी सराफा कारीगर होरीलाल गुप्ता ने बताया कि अचानक हड़ताल  हो जाने के बाद कुछ दिन तो  चल गया, लेकिन अब घर-गृहस्थी चलाने के लिए कर्ज लेना पड़   रहा है। नगर के बसनही बाजार स्थित चुन्नी मुन्नी की गली निवासी कारीगर गोकुल प्रसाद ने बताया कि ग्राहकों का जो पुराने व नए गहनों की जुड़ाई, सफाई व मरम्मत का करके जो मजदूरी मिलती है, उसी से भरण पोषण होता है, लेकिन सराफा का काम बंद होने से परिवार के भरण-पोषण में काफी परेशानी हो रही है।



नगर के भटवा की पोखरी निवासी कारीगर नंद लाल ने बताया किसी तरह कर्ज लेकर काम निकाला जा रहा है, अगर यही हाल रहा तो आने वाला होली का त्योहार भी काफी फीका रहेगा, जिसका असर परिवार पर पड़ेगा। नगर के बड़ी माता की गली स्थित इंदर यादव घर से यही उम्मीद लेकर से निकलते हैं कि आज शायद दुकान खुल जाए और काम आगे बढ़े, लेकिन शाम को वापस निराश होकर ही घर जाना पड़ता है
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