वासलीगंज में खराब पड़े हैंडपंप की मरम्मत करते मजदूर।
- फोटो : mirzapur
गर्मी शुुरू होते ही हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पेयजल समस्या ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। हालात यह है कि नगर के लिए टांडाफाल में महज सात फीट पानी बचा है, जिससे अप्रैल माह में लोगों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ सकता है। टांडाफाल से नगर के एक तिहाई हिस्से में पेयजलापूर्ति की जाती है। टांडाफाल में पानी की कमी के कारण लोगों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ सकता है। नगर में पाइप लाइन में लिकेज से पानी की बर्बादी होती है, साथ ही पीने योग्य पानी से सड़क की धुलाई तो आम बात है।
नगर पालिका परिषद द्वारा लाखों खर्च के बाद भी नगर में पेयजल किल्लत बनी हुई है। हर साल गर्मी शुुरू होने के बाद लोगों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ता है। पेयजल के लिए तमाम योजनाएं चलाए जाने के बाद भी लोगों को समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। नगर के विभिन्न इलाकों में लोग पेयजल समस्या से रूबरू होने लगे हैं।
दो लाख 34 हजार 710 की आबादी वाले इस नगर में 20 हजार पाइप लाइन कनेक्शन से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसके लिए 11 ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। जिनमें से नौ चालू हालत और दो बंद पड़े हैं। नगर पालिका प्रशासन की मानें तो प्रति व्यक्ति 135 एलपीसीडी (लीटर पर कैपिटा पर डे) पानी की आवश्यकता होती है। लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए पालिका द्वारा पेयजल समस्या को दूर करने के लिए तैयारी की जा रही है।
जिसके तहत 63 बड़े ट्यूबवेल, 1625 हैंडपंप, 400 मिनी ट्यूबवेल की व्यवस्था की गई है। जिसमें से वर्तमान समय में 12 मिनी ट्यूबवेल और 200 हैंडपंप रिबोर योग्य हैं। इनकों रिबोर कराने के लिए जल निगम अभाव शाखा को हैंडपंप और मिनी ट्यूबवेल की सूची भेजी जा चुकी है। सहायक अभियंता जलकल नगर पालिका सौरभ श्रीवास्तव का कहना है कि पेयजल संकट को दूर करने के लिए संसाधनों की व्यवस्था के साथ ही लोगों में जागरुकता जरूरी है। जनता पेयजल के दुरुपयोग को रोके साथ ही संरक्षण पर भी बल दे, जिससे पानी को बचाया जा सके।