बारिश के बाद महुवरिया स्थित बीएलजे इंटर कालेज के मैदान में लगे पानी में मस्ती करते बच्चे।
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मानसून की पहली बारिश होते ही जहां पहले से धान की नर्सरी डाली गई थी, वहां धान की रोपाई का भी काम शुरू हो गया, लेकिन जिले के अधिकांश इलाकाें में अभी पर्याप्त बारिश नहीं होने व नहराें के साथ नहीं देने से धान की नर्सरी तक नहीं डाली गई है। साधन संपन्न किसानों ने तो नर्सरी उगा कर रोपाई का काम शुरू करा दिया है। वहीं अधिकांश किसान बारिश के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए हैं। जून माह में तीन से अधिक घंटे बारिश होने से लोगाें को राहत मिली है। कुछ लोग तो बाहर निकल का बकायदा बारिश में भीगे भी। मौसम का मिजाज बदलने से हुई मौसम सुहाना हो गया, वहीं तापमान लुढ़क कर काफी नीचे चला गया।
किसानाें को अब भी भरोसा है कि जिस तरह से मौसम का मिजाज चल रहा है, आगामी कुछ दिनों बाद अच्छी बारिश होगी और अद्रा नक्षत्र में ही धान की नर्सरी डाली जाएगी। हालांकि पहली झमाझम बारिश को देखते हुए कुछ स्थानों पर धान की रोपाई कर दी गई। जबकि अन्य किसाना अभी और नमी होने का इंतजार कर रहे हैं। उनका मानना है कि अधिक नमी में रोपाई काफी कारगर साबित होगी। जून माह में अब तक तीन से चार बार तेज आंधी के साथ हल्की बूंदाबांदी तो हुई, लेकिन धरती तृप्त नहीं हो पाई। किसानों की जमीन अब भी प्यासी है। किसान खेतों को देख कर धान की नर्सरी डालने के लिए क्यारी तो बना लिए, लेकिन नमी के अभाव में धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं, जबकि अद्रा नक्षत्र 22 जून को शुरू हो गया है। धान के कटोरे के नाम से विख्यात जमालपुर के किसान अद्रा नक्षत्र में जोरदार तरीके से धान की नर्सरी डालकर अच्छी पैदावार की उम्मीद बांधे हुए हैं।
आसाढ़ माह तीन दिन गुजर जाने के बाद भी जमालपुर के लगभग नब्बे प्रतिशत जमालपुर इलाके में धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। जनपद के लालगंज, चुनार, मड़िहान सहित सिटी ब्लाक से सटे ग्रामीण अंचलों में जहां सिंचाई की पर्याप्त व्यवथा है और साधन संपन्न किसान अपने खेतों में धान की नर्सरी डालने के साथ ही धान की रोपाई का भी काम आरंभ करा दिए हैं,। लेकिन जिले के अधिकांश किसान अच्छी बारिश नहीं होने से अब भी खेती किसानी को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।