महिलाएं-बालिकाएं जगह-जगह समूह के एकत्रित होकर विधि-विधान पूर्वक पूजन-अर्चन किया। पूजन उपरांत बहनों ने भाईयों के माथे पर रोली-अक्षत लगाकर उनकी लंबी आयु के लिए कामना किया।
पूजन की तैयारियों को लेकर सुबह से ही बहनों में उत्साह दिखाई दे रहा था। घरों के बाहर चौक बनाकर समूह में पूजन किया गया।
भैयादूज पर नगर के विभिन्न मुहल्लों में महिलाओं- बालिकाओं ने श्री गोवर्धन जी का विधि विधान पूर्वक पूजन-अर्चन किया। नगर सहित जिले के ग्रामीण अंचलों में भी सामूहिक रूप से श्री गोवर्धन जी पूजन परंपरागत तरीके से किया गया।
पूजन उपरांत बहनों ने अपने-अपने भाईयों की दीर्घायु के साथ ही मंगलकामना की। श्री गोवर्धन जी के पूजन की तैयारी में महिलाएं-बालिकाएं शुक्रवार की सुबह से ही जुट गई थीं।
बहनों ने अपने-अपने घरों के सामने गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर विधिवत पूजन-अर्चन किया। पूजन के दौरान महिलाओं ने सोन-चिरई की कथा का भी श्रवण किया।
कथा श्रवण करने के उपरांत बहनों ने अपने-अपने भाईयों के माथे पर चंदन-रोली और अक्षत का तिलक लगाकर उनके सुखमय जीवन की कामना की।
बहनों ने भाईयों को माला पहनाकर उनको दीपावली के दिन भरे हुए घरिया एवं चना को खिलाया। भाईयों को मिष्ठान और चना ग्रहण कराने के बाद बहनों ने भी अपना व्रत तोड़ा।
भाई और बहनों के अटूट रिश्ते के त्यौहार पर घरों में बन रहे तरह-तरह के लजीज व्यंजनों को भी बहनों ने अपने भाईयों को खिलाया। भाईयों ने भी पूरे उत्साह से बहनों को उपहार आदि देकर उनकी भावनाओं का पूरा सम्मान किया।