जब सोनेलाल पटेल ने राजनैतिक दल बनाया तो उसका नाम काफी सोच समझ कर अपना दल रखा था, लेकिन उनके निधन के बाद छह वर्षों में ही अपना दल का अपनापन टूट कर दो फांक हो गया। एक पक्ष में मां कृष्णा पटेल और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पल्लवी पटेल तो दूसरे पक्ष में मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल खड़ी हैं।
अंतर्कलह से जूझ रहे अपना दल के लखनऊ स्थित कार्यालय को लेकर भी पुलिस के बीच बचाव की नौबत आ चुकी है। अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का मामला भी बीच में गरमा गया था।
जब कृष्णा पटेल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से सांसद बेटी अनुप्रिया को पार्टी से निष्कासित कर दिया और लोकसभा में नेता अपना दल के पद से भी अनुप्रिया को हटाने की सिफारिश कर डाली।
इस पर बेटी अनुप्रिया ने खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया। यह मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया। चुनाव आयोग में अभी भी यह फैसला लंबित है कि कौन अपना दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा। स्थिति यह है कि जिन जिलों में अपना दल का जनाधार है वहां अपना दल के दो-दो जिला कार्यालय संचालित हो रहे हैं।