मिलावटी दूध से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। ऐसे लोगों को सख्त सजा देने के पक्ष में है। जिले में मिलावटी दूध की बिक्री को रोकने के लिए जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसए) ने जनवरी में ही दूध में मिलावट का एक मामला पाया था, जिसमें एसीजेएम ने 18 माह की सजा और दो हजार का जुर्माना लगाया था।
दूध की आपूर्ति जिले में ग्रामीण इलाकों से होती है। दूधिए अक्सर उसमें पानी मिला देते हैं लेकिन प्रशासन सबसे ज्यादा केमिकल से तैयार दूध सबसे हानिकारक होता है। जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने जनवरी मिलावटखोरों के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया था। इस दौरान दूधियों से दूध और दूकानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने के बाद मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजवंश श्रीवास्तव ने एसीजेएम कोर्ट में वाद दाखिल किया। साक्ष्य के आधार पर एसीजेएम ने फैसला सुनाते हुए फरवरी माह में चुनार क्षेत्र के दूधिए गंगाराम को एक वर्ष छह माह की सजा और दो हजार रुपया का जुर्माना लगाया।
वहीं अन्य दो दूधियों पर भी बगैर पंजीयन के दूध बेचने पर दस-दस हजार का जुर्माना लगाया गया। इसके बाद माह फरवरी में मिलावटखोरों के खिलाफ चले सघन अभियान में 110 निरीक्षण कर 21 नमूना लिया गया साथ ही 19 मिलावटखोरोें के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत किया गया।
हल्दी में मिलावट पर सजा
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम मनोज कुमार सिंह द्वितीय ने खड़ी हल्दी में मिलावट के आरोपी पिता-पुत्र को सुनवाई के बाद दोष सिद्ध पाया। जिसके बाद आरोपी पिता-पुत्र को ढाई वर्ष की कठोर कारावास की सजा और प्रत्येक को दस हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन अनुसार थाना चुनार क्षेत्र के मंगरहा गांव में श्रवण कुमार सिंह पुत्र नेमीनाथ की दूकान से खाद्य सुरक्षा अधिकारी दीपक कुमार श्रीवास्तव ने 30 जुलाई 2011 को जांच के दौरान अनाज, खाद्य तेल, मसाले, बिस्कुट, चाय आदि बगैर लाइसेंस को बेचते हुए पाया।
निरीक्षक ने खड़ी हल्दी का नमूना लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा था, जिस पर लेड क्रोमेट की परत पाई गई थी। यह रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लिहाजा आरोपी श्रवण कुमार के खिलाफ खाद्य अपमिश्रण का मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसकी सुनवाई न्यायालय द्वारा शनिवार को हुई। न्यायालय ने दूकान मालिक पर दोष सिद्ध पाते हुए दो वर्ष छह माह की सजा और दस-दस हजार के अर्थदंड से दंडित किया।