कोरोनाकाल में भोजपुरी गीतों के कलाकार और आर्केस्ट्रा में काम करने वाले कलाकार बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। शादी-विवाह और अन्य धार्मिक आयोजनों में काम करके अपना पेट पालने वाले ऐसे कई कलाकारों के सामने परिवार का पालन- पोषण करना मुश्किल हो रहा है। इसमें गायन और वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकार भी शामिल हैं जो मुफलिसी में जी रहे हैं।
कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्हें जनपद के अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद आदि तमाम शहरों और महानगरों के साथ-साथ विदेशों में भी कार्यक्रम करने का मौका मिल जाता था लेकिन महामारी के इस दौर में कोई पूछ नहीं रहा है। महज तीन महीने के सीजन में प्रत्येक कलाकारों के साल भर में कम से कम 40 से 50 कार्यक्रम हो जाते रहे, जो 5 से 10 लाख रुपया तक कमा लेते थे। महामारी के चलते आज 5000 रुपये का भी काम नहीं हो पा रहा है। प्रसिद्ध भोजपुरी गायक कलाकारों संग वाद्य यंत्र, इंस्ट्रूमेंट कलाकार, साउंड कलाकार भी परेशान हैं।