गंगा मइया में जब तक पानी रहे, मेरे सजना तेरी जिंदगानी रहे..गाकर और कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवाचौथ का व्रत रखकर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु की कामना की।
शुक्रवार को शाम चंद्रोदय के बाद व्रती महिलाओं ने अपने-अपने छतों पर कलश स्थापित कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। तत्पश्चात सुहागिन महिलाओं ने चलनी से चांद का दर्शन करके अपने व्रत को तोड़ा।
कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्थी को व्रती महिलाओं ने विधि-विधान पूर्वक पूजन कर अपने पति के दीर्घायु की कामना की। करवाचौथ व्रत के दौरान सुहागिन महिलाएं सज-धज कर कहीं पर समूह में तो कहीं पर अकेले ही करवा चौथ का विधिवत पूजन-अर्चन किया।
पूजन को लेकर नवविवाहित महिलाओं में काफी उत्साह दिखा। पूजन के लिए अधिकांश महिलाओं ने गुरुवार की सांयकाल को ही अपने हाथों में मेंहदी रचाई। शुक्रवार को शाम चांद देखने के पूर्व व्रती महिलाएं थाल में पूजन सामग्रियों को लेकर अपने छतों पर पहुंच गई।
चंद्रोदय होने के बाद व्रती महिलाओं ने बड़े ही श्रद्घा भाव से पूजन-अर्चन कर पति के लंबी उम्र के लिए कामना किया। सायंकाल छत पर पहुंची महिलाओं ने विधि-विधान पूर्वक पूजन-अर्चन करने के बाद चलनी से चांद का दीदार करके अपने व्रत को तोड़ा।
सुहागिन महिलाओं में करवाचौथ पूजन को लेकर उत्साह देखते ही बन रहा था। व्रती महिलाओं का पूजन कार्यक्रम में उनके परिवार के सदस्यों ने भी बढ़चढ़ कर सहयोग प्रदान किया।