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संगतराशी का अद्भुत नमूना है पक्की सरांय का कुआं

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मिर्जापुर। अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर में जिले के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल इस बात की तस्दीक है कि मजबूती और नक्काशी के लिए यह मुफीद हैं। गुलाबी पत्थरों की यह पहचान नवीनतम नहीं है, प्राचीन काल से जिले के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल किले और मंदिरों के निर्माण में होता आया है। जिले में जो भी प्राचीन स्मारक या निर्माण हुए, वे आज भी आकर्षण के केंद्र हैं। इन्हीं में से एक है पक्की सरांय में बना प्राचीन कूप।
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इस कुएं पर बनी नक्काशी अद्वितीय है। पत्थर पर इतनी महीन कारीगरी प्राय: देखने को नहीं मिलती। इस कुएं का निर्माण हिंदी के साहित्यकार पं. बद्री नारायण चौधरी प्रेमधन के पितामह पंडित शीतला प्रसाद उपाध्याय ने विक्रमी संवत 1908 अर्थात सन् 1851 में कराया था। मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों से बने इस कुएं को इसकी बनावट अद्भुत बनाती है। यह कुआं अष्टकोणीय आकृति का बना है। यह आठ आकर्षक खंभों एवं मेहराबों से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और साथ ही उसी के अनुरूप सीढ़ियां भी बनी हुई हैं। पत्थरों को ही लॉक बनाकर दीवार खड़ी की गई है। पत्थरों की ऐसी नक्काशियां जयपुर, खुजराहो, अजंता व एलोरा में मिलती हैं। कहने को तो पर्यटन विभाग, सांस्कृतिक विभाग और पुरातत्व विभाग एतिहासिक स्थलों का रखरखाव करता है पर आज भी इन इमारतों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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